🌖 समाज में कोई तीसरा नव यथार्थ
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अच्छे-अच्छे लोग भी इस परिस्थिति को समझ नहीं पा रहे हैं या अपनी पूर्वग्रही अकड़ में आँखें बन्द किए हुए हैं ? जन जीवन असमानता की एक नयी तबाही की जटिल दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है ।
आज के लोकतंत्र को नया पाठ तो
दरकार नहीं ?
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क। १८.०४.'२२.
Tuesday, December 10, 2024
समाज में एक तीसरा नव यथार्थ !
Sunday, December 8, 2024
'चाँद निकलेगा मगर हम न उधर देखेंगे '
Friday, December 6, 2024
झूठ: एक उत्पाद !
Tuesday, December 3, 2024
'शब्दकोश : अभी बचा है एक चरित्र धान !
Thursday, November 28, 2024
एक दो पँतिया
Sunday, November 24, 2024
रिश्तों के ड्राइंग रूम में
🍂 रिश्तों के ड्राइंग रूम में !
रिश्तों के ड्राइंग रूम में तभी तक रहें जब तक कि बजते-बोलते-साज़ या कम से कम गाते हुए ट्रांजिस्टर रेडियो लगें कि कोई पुराना ग्रामोफोन सेट। कोई एक चीज़ बन कर बिना स्पर्श किए जाते हुए-बेआवाज़ बने कभी ना टिकें।
जिस पल ऐसा लग जाय शानदार ढंग से रुख़्सत हो लें।
🍁 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
Thursday, November 14, 2024
छुड़कुल्ला बनाम शगूफ़ा।
मैथिलीक ‘छुड़कुल्ला’ संँ बेसी ललित आ व्यञ्जनाक शब्द ‘शिगूफ़ा’ छैक? कहै जाउ तँ। तथापि,
अपने ध्यान देबै जे प्रसंग अयला पर कय गोटय मातृभाषा प्रहरी लोक सेहो ‘शगूफ़े लिखता / लिखती, ‘छुड़कुल्ला’ नहिं।
एक दिन एही बाटे नीक संँ नीक भाषाक रस सौरभ सुखा क’ सिठ्ठी भ’ जाइ छै। 🌺!🌺 गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
