इन दिनों फेसबुकादि पर मेरी सक्रियता यूँ समझें कि सरकारी अस्पताल में भर्ती कोई मरीज़ गाना गा रहा है !
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गंगेश गुंजन. #उचितवक्ताडेस्क।
Wednesday, September 16, 2026
अस्पताल में मरीज का गाना
शेरनुमा : हम तो समझे डूब कर माज़ी में कबके
हम तो समझे डूब कर माज़ी में कब के मर चुके,
कौन है फिर जी रहा है मज़े से इस जिस्म में। 🍁
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे
Sunday, September 13, 2026
हिन्दी दिवस !
Wednesday, September 9, 2026
शेर नुमा : तर्कीली तुक का तो मैं भी क़ायल हूं
तर्कीली तुक का तो मैं भी क़ायल हूँ, काठ-कसैली तुक से घायल हो जाता हूँ !
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ता.
ग़ज़लनुमा। : मंत्रमुग्ध होना चाहे
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मंत्रमुग्ध होना चाहे
जी उससे मिलना चाहे।
कली मुन्तज़िर है किसके
अधरों पर खिलना चाहे
किससे मिले हुई मुद्दत
किससे दिल मिलना चाहे
वक़्त शिकंजा कसता है
ज़ीस्त नहीं उठना चाहे
एक बराबर ख़िजाँ बहार
खिलना - मुरझाना चाहे
ख़त भर के हर्फ़-ए-मायूस
दफ़्न छुपा रहना चाहे
जवांँ सियासी हल्क़ों में
जानें क्या घटना चाहे
चश्मे नम वक़्त-ए-रुख़्सत
हसरत यह रहना चाहे
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गंगेश गुंजन
#उवडे.
Monday, September 7, 2026
शे'रनुमा कुछ
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१.
पेट खाली हो मगर सीधी रहती है रीढ़
तने ज़मीर सीधा देखते हैं वो जो फ़क़ीर।
२.
बड़े मज़े की लड़ाई थी
दोस्ती पर आ के ख़त्म हुई।
३.
ख़ामुशी की जु़बाँ में उस क़िस्सए ग़म का बयान
चश्म-ए-नम भी बज़्म में देखा है कल रक़ीब को।
🌼 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Sunday, September 6, 2026
उम्मीद का क़द हौसले से बाहर न हो
उम्मीद तो जी भर रक्खें कोई हर्ज नहीं,मगर यह ध्यान भी कि हौसले से बाहर न जायंँ.
💢 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
