अजीब क़ैफ़ियत है उम्र की देखिए ज़रा, बा'प ही चाहे तवज्जो अपने बेटे से !
🍁 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
अजीब क़ैफ़ियत है उम्र की देखिए ज़रा, बा'प ही चाहे तवज्जो अपने बेटे से !
🍁 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
'अनुभव और समझ'
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अनुभव और समझ में दादा और पोता का रूपक देखा जा सकता है क्या ? अथवा नाना-नाती का ? ▪️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
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आभासी संसार में 'नूतन आत्मरति'।
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कृपया कहें तो -
फेसबुक आदि पर स्त्री-पुरुष जो भी हों,अगर बार-बार अपनी ही फ़ोटुओं को रस ले-ले कर डालें और लिखते रहें तो इसे एक प्रकार की 'नूतन 'आत्मरति' क्यों न समझा जा सकता है ?
आप क्या सोचते हैं लोगो ?
✨ गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क जिज्ञासा !
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हमारी हिंदी कहती है :
‘आवेश’ में आकर मनुष्य को कोई क़दम नहीं उठाना चाहिए।’
किन्तु मेरी मैथिली तो कहती है :
पहिले डेग उठैत छै मनुखक प्रेमक ककरो 'आवेशे' मे। (अर्थात, प्रेम का पहला क़दम ही मनुष्य का किसीआवेश में ही उठता है 😆)। 📕| गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
इन दिनों फेसबुकादि पर मेरी सक्रियता यूँ समझें कि सरकारी अस्पताल में भर्ती कोई मरीज़ गाना गा रहा है !
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गंगेश गुंजन. #उचितवक्ताडेस्क।
हम तो समझे डूब कर माज़ी में कब के मर चुके,
कौन है फिर जी रहा है मज़े से इस जिस्म में। 🍁
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे