Friday, October 23, 2026

टिप्पणी : व्यापार और दोस्ती के मार्ग

तरीक़े से केवल चतुराई और व्यापार किये जा सकते हैं। दोस्ती और कविताई का तो अपना रूहानी रस्ता है और बहुत साफ़-सुथरा,मासूम !
🌻

गंगेश गुंजन                              #उचितवक्ताडेस्क 

Thursday, October 22, 2026

दू पंतिया : मेरे मिज़ाज की क्या पूछते हो...

​"मेरे मिज़ाज की क्या पूछते हो गुंजन
यूंँ कि इक झोपड़ी में शहंशाह रहता है.
                        🪾                     

                   गंगेश गुंजन                                                   #उचितवक्ताडे.

Tuesday, October 20, 2026

    अब उसी दिन के लिए  जीना है
  कभी जिस दिन के लिए मरना था ...
                 गंगेश गुंजन 

Monday, October 19, 2026

झूठ सच का बाज़ार.जनता ग्राहक

|       झूठ-सच के बाज़ार में ग्राहक जनता        |
                                 🕸️
देश की परिस्थितियाँ माक़ूल पा कर झूठ और सच का बाज़ार धड़ल्ले से चल पड़ा। बड़ी फुर्ती से विधिवत इनका बाज़ार संभव सर्वे किया गया जिसमें अखिल विश्व निर्यात की पर्याप्त संभावना पा कर तत्काल इन्हें उत्पाद भी बना लेना सोचा गया।आनन फानन में उत्पादन चालू हो गया जो उपभोक्ता रुचि के स्तर पर बॉक्स ऑफ़िस सफल साबित हुआ।

सत्य के लिए अपेक्षित संसाधन और कच्चा माल मिलना जल्दी ही समाप्त हो गया।किन्तु झूठ का  इतना विपुल कच्चा माल मिलने लगा कि इसके कारख़ाने पर कारख़ाने खड़े होते चले गए…।
   इन कारख़ानों के मिले जुले शातिर स्वामी दोनों ही तरफ़ के थे।
                        गंगेश गुंजन                             ‌।                #उचितवक्ताडेस्क

Sunday, October 18, 2026

शेरनुमा : कोई अन्जान सी हवा...

कोई अन्जान हवा-सी आ कर लगती है मुझे,वर्ना वे तो किसी और अकेले की बात कर रहे थे...
                           🌼        

                      गंगेश गुंजन

                   #उचितवक्ता  

Wednesday, October 14, 2026

रिश्ते और आयु

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      विस्तृत आयु के अनुभव में आज रिश्तों के  
   अनचीन्हे अबूझ इतने बड़े संसारमें में मैं भी  
    किसी अबोध बालक का कौतूहल लिए एक
    जगह खड़ा हुआ हूँ...                               •
                          गंगेश गुंजन 
                      #उचितवक्ताडेस्क।

Tuesday, October 13, 2026

फेसबुक पर उम्मीद

                       फेसबुक पर उम्मीद
‘फेसबुक पर पढ़ने रहने को अब बहुत कम रह गया है ।’-पिता ने कहा।
‘तब भी तो आप दिन भर इसी पर आँखें गड़ाए रहते हैं !’-बेटे ने कहा।
‘हाँ,क्या करूंँ,कुछ दिख भी जाय बस इस उम्मीद में !' -पिता ने कहा।
                              🌱🌱
                           गंगेश गुंजन।                                               #उचितवक्ताडेस्क.