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१.
ग़मगु़सारों की भरी महफ़िल में चश्म-ए-नम कहीं
देखने वाला नहीं दीखा हमें वह दीदावर।
२.
जान-ए-महफ़िल भी नहीं जिस शब रही
क़हक़हे थे कम न रक़्श-ए-बज़्म ही बेजान था।
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(दोनों आज़ाद मगर आज एक साथ आमद) गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
Thursday, August 13, 2026
दो आज़ाद शे'रनुमा : ग़मगुसारों की भरी महफ़िल
Wednesday, August 12, 2026
राजनीति की बाढ़
राजनीति में बारहो महीने बाढ़ आई रहती है। प्रगति की सब फसल पानी में ही फूलती- फलती रहती है। ▪️
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Saturday, August 8, 2026
राजनीति और प्रायश्चित्त...
राजनीति में कोई प्रायश्चित्त -पश्चात्ताप है कि नहीं ????????????????????????? जैसे अब बोफोर्स प्रकरण पर क्या करेगी राजनीति?
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
Thursday, August 6, 2026
शे'रनुमा : इस बदमंज़र में इन्साँ ....
इस बदमंज़र में इन्साँ जीना ही नहीं चाहे
और सियासत ख़ुशमंज़र होने भी नहीं देती। °° गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Wednesday, August 5, 2026
अकेला - अकेली
अकेले खाना खाता हुआ पुरुष करुण लगता रहता है। अकेली भोजन करती हुई स्त्री अपमानित और दयनीय।
▪️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Wednesday, July 29, 2026
कुशल मंगल जानने की बीमारी
दसेक बीमारियों से घिरे ही रहते हैं हम हरदम,
सबों की कुशल-मंगल जानने वाली तो आफ़त है ✨ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
वर्तमान भविष्य
वर्तमान की सब मुश्किलें दिखाई देती हैं,और भविष्य की केवल आसानियांँ।
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गंगेश गुंजन #उवडे.
