Wednesday, April 15, 2026

दो पंतिया। ढलते मन की परछाई

     जाते मन की परछाई है 
      यह जो मरी तन्हाई है।
            गंगेश गुंजन,
       #उचितवक्ताडेस्क

Monday, April 13, 2026

इश्क़ पर चाहतें यूँ हो गईं काबिज़,              ज़िन्दगी बेमज़ा तो होनी ही थी।
गंगेश गुंजन 

Thursday, April 9, 2026

सब राजनीति

🌐।                🪾🪾
        जो करती है राजनीति  अब
        युद्ध ठान  कर  युद्ध  विराम
        शान्ति बहाल  करती है  जो 
        निर्मम   वो  ही  क़त्लेआम 
                दुनिया कभी देश के नाम 
        जो करती है राजनीति सब…
                        📓 
                  गंगेश गुंजन 
             #उचितवक्ताडेस्क.

Wednesday, April 8, 2026

टिप्पणी : लेखक लेखक!

पहले कोई लेखक,सबसे पहले लेखक होता था। आज लेखक पहले कुशल मैनेजर होता / होती है बाद में लेखक।
                 गंगेश गुंजन 
             #उचितवक्ताडेस्क।

Tuesday, April 7, 2026

शे'रनुमा : ग़ायब हैं अथवा इन्सान

लिखते-पढ़ते ही रह करके भी क्यूँ ना जीया जाए जब                                      दुनिया भर की राजनीति से ग़ायब हैं  इन्सान-अवाम अब !

                          🪾    

               गंगेश गुंजन #उवडे .

Monday, April 6, 2026

टिप्पणी टकिया पुरस्कार

‘टकिया' 'पुरस्कार’ बेसी काल ओइ प्रतिभाक पँचकठिये साबित होइत छैक।✨         

गंगेश गुंजन ,   #उचितवक्ता.

जीवन युद्ध !

.          युद्धों की महाभूमि : जीवन !
                         ❄️
  मनुष्य के दो बड़े जीवन-युद्धों के मैदान
दुनिया भर एक समान नहीं हैं।
बेरोज़गारी की लड़ाई और मनुष्य की
स्वतंत्रता का संग्राम सर्वथा भिन्न मैदानों
में और अलग-अलग हथियारों से लड़े
जाते हैं ।
                        ।📕। 

            गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.