बड़े कवि जब छोटे कवि की उपेक्षा करने लगें तो समझें उनकी कविता पेड़से टूट कर ज़मीन पर गिरने लगी।
• गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
Tuesday, May 5, 2026
टिप्पणी : बड़ा कवि
Sunday, May 3, 2026
दो पंतिया : साहिल को भी रोज़ इम्तिहाँ..
साहिल को भी रोज़ इम्तिहाँ देना होता है
दरिया से कश्ती महफ़ूज किनारे लाने तक। 💢
गंगेश गुंजन। #उचितवक्ताडेस्क.
Thursday, April 30, 2026
दो पंतिया : भूलते भी रहे सब को...
भूलते भी रहे सबको याद भी करते गये,
नींदकी गोलिआँ खाकर रात भर हम जग गये। ▪️
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
Monday, April 27, 2026
जीवन के फेसबुक पर
🌐
जीवन के फेसबुक पर ऐसी कितनी ही बड़ी और गूढ लगती हुई बातें दिखती रहती हैं जो वास्तव में उतनी होती भी नहीं हैं। लेकिन किसी बड़े नामी कलम से निकली हैं।
सभी बड़े लगते हुए नाम सदैव आदर और अनुकरणीय ही नहीं होते।
📕। गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
Sunday, April 26, 2026
आम आम बनाम सुख और सुख (टिप्पणी)
आम ज़र्दालू ही क्यों न हो मनुष्य को दीघा माल्दह खाए बिना तो पूरा चैन मिल ही नहीं सकता।
सुख का भी यही हाल है। सुख भी आदमी को एक ही तरह का नहीं विविध प्रकार का मिले तभी तृप्त होता है।
🌀 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Saturday, April 25, 2026
दो पंतिया : बेवजह भी नहीं लगता
बेवजह ही नहीं लगता है कुछ भी अच्छा
अच्छा होने से ही कुछ अच्छा लगता है।
🍁|🌸|🍁
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Thursday, April 23, 2026
शे'रनुमा : किसी के ज़ख़्म का...
किसी के ज़ख़्म का निशान पाँवों में लेकर
किसी की रूह में कब से न चल रहे हैं हम।
🍁🍁
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Subscribe to:
Posts (Atom)
