अजनबी दु:ख-सुख के नयों का यह ज़माना है, पुरानो ! सहो, समझो इसी में गर जीना है।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
अजनबी दु:ख-सुख के नयों का यह ज़माना है, पुरानो ! सहो, समझो इसी में गर जीना है।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
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दु:ख ही आए तो कुछ नया आए
बार - बार एक वो ही क्या आए
*
हम कोई डरते नहीं हैं ग़म से
चाहते हैं कि कोई नया आए
*
गंगेश गुंजन #उवडे.
🌐
अपनी-अपनी मूढ़ता-मूर्खताओं के साथ,अपनी-अपनी मान्यताओं,विचार और विद्वत्ताओं के साथ स्वतंत्रतापूर्वक निर्भय जीने विचरने की सबजन सुलभ
ऐ प्यारे स्वैच्छिक लोकतंत्र की बस्ती- फेसबुक !
तुझे सलाम !!
❄️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
निरे बकवास को भी मूल्यवान विचार मान कर 'वाह-वाह' करने का यह फेसबुकिया बुद्धिजीवी-काल भी,कमाल है !
🌐 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.