दोस्ती है दुश्मनी है इतना सारा क़रार है।
आज सुबह मेज़ पर वक्त़ का अखबार है।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
लिखते-पढ़ते ही रह करके भी क्यूँ ना जीया जाए जब दुनिया भर की राजनीति से ग़ायब हैं इन्सान-अवाम अब !
गंगेश गुंजन #उवडे .
‘टकिया' 'पुरस्कार’ बेसी काल ओइ प्रतिभाक पँचकठिये साबित होइत छैक।✨
गंगेश गुंजन , #उचितवक्ता.