।कृष्णाष्टमी।
उस सीधी,सरल सन् १९५७ ई.में कहांँ मालूम था कि हमें २०२६ की ऐसीअशान्त कुरूप ईस्वी भी देखनी है..
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
।कृष्णाष्टमी।
उस सीधी,सरल सन् १९५७ ई.में कहांँ मालूम था कि हमें २०२६ की ऐसीअशान्त कुरूप ईस्वी भी देखनी है..
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
- विडंबना -
मनुष्य को यह जीवन मिलता तो है एक
अनमोल वरदान की तरह लेकिन ऐसे जैसे किसी
शिशु के नन्हे हाथों में धर्मग्रंथ या गीता-ज्ञान की
पुस्तक के समान ।
.📕. गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क
ग़मगु़सारोंकी भरी महफ़िल में चश्म-ए-नम कहीं,
देखने वाला नहीं दीखा हमें वो दीदावर।
✨ गंगेश गुंजन #उवडे.
आहट जुदा-जुदा हो तो दरवाज़ों पर दस्तक-सी लगती हैं। एक साथ बज उठें घरोंकी ज़ंजीरें तो बस्ती भर जग जाती है।. ।•। गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.