यह जो मरी तन्हाई है।
गंगेश गुंजन,
#उचितवक्ताडेस्क
लिखते-पढ़ते ही रह करके भी क्यूँ ना जीया जाए जब दुनिया भर की राजनीति से ग़ायब हैं इन्सान-अवाम अब !
गंगेश गुंजन #उवडे .
‘टकिया' 'पुरस्कार’ बेसी काल ओइ प्रतिभाक पँचकठिये साबित होइत छैक।✨
गंगेश गुंजन , #उचितवक्ता.
. युद्धों की महाभूमि : जीवन !
❄️
मनुष्य के दो बड़े जीवन-युद्धों के मैदान
दुनिया भर एक समान नहीं हैं।
बेरोज़गारी की लड़ाई और मनुष्य की
स्वतंत्रता का संग्राम सर्वथा भिन्न मैदानों
में और अलग-अलग हथियारों से लड़े
जाते हैं ।
।📕।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.