तरीक़े से केवल चतुराई और व्यापार किये जा सकते हैं। दोस्ती और कविताई का तो अपना रूहानी रस्ता है और बहुत साफ़-सुथरा,मासूम !
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क
तरीक़े से केवल चतुराई और व्यापार किये जा सकते हैं। दोस्ती और कविताई का तो अपना रूहानी रस्ता है और बहुत साफ़-सुथरा,मासूम !
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क
"मेरे मिज़ाज की क्या पूछते हो गुंजन
यूंँ कि इक झोपड़ी में शहंशाह रहता है.
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
| झूठ-सच के बाज़ार में ग्राहक जनता |
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देश की परिस्थितियाँ माक़ूल पा कर झूठ और सच का बाज़ार धड़ल्ले से चल पड़ा। बड़ी फुर्ती से विधिवत इनका बाज़ार संभव सर्वे किया गया जिसमें अखिल विश्व निर्यात की पर्याप्त संभावना पा कर तत्काल इन्हें उत्पाद भी बना लेना सोचा गया।आनन फानन में उत्पादन चालू हो गया जो उपभोक्ता रुचि के स्तर पर बॉक्स ऑफ़िस सफल साबित हुआ।
सत्य के लिए अपेक्षित संसाधन और कच्चा माल मिलना जल्दी ही समाप्त हो गया।किन्तु झूठ का इतना विपुल कच्चा माल मिलने लगा कि इसके कारख़ाने पर कारख़ाने खड़े होते चले गए…।
इन कारख़ानों के मिले जुले शातिर स्वामी दोनों ही तरफ़ के थे।
गंगेश गुंजन । #उचितवक्ताडेस्क
कोई अन्जान हवा-सी आ कर लगती है मुझे,वर्ना वे तो किसी और अकेले की बात कर रहे थे...
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ता
फेसबुक पर उम्मीद
‘फेसबुक पर पढ़ने रहने को अब बहुत कम रह गया है ।’-पिता ने कहा।
‘तब भी तो आप दिन भर इसी पर आँखें गड़ाए रहते हैं !’-बेटे ने कहा।
‘हाँ,क्या करूंँ,कुछ दिख भी जाय बस इस उम्मीद में !' -पिता ने कहा।
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गंगेश गुंजन। #उचितवक्ताडेस्क.