Wednesday, May 13, 2026
दो पंतिया : चाहते थे उधरसे ही जाएँ,..
Monday, May 11, 2026
रचनाकार की ख़्वाहिश
▪️
रचनाकार की यह ख्व़ाहिश होती ही है कि उसका लिखा पढ़ते हुए पाठक को कोई और याद नहीं आए यहांँ तक कि कबीर और निराला भी। और जो याद आए ही तो फिर यूंँ आए जैसे वह,किसी बहुत परिचित सफ़र के पुराने पड़ाव से आगे चला जा रहा है। ▪️
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
Sunday, May 10, 2026
राजनेता का रिरियाना...
टिप्पणी
Saturday, May 9, 2026
व्यंग्य दूपंतिया :
Friday, May 8, 2026
दो पंतिया : सब के दुःख एक
जिस दिन बस्ती भर का दुःख बस्ती भर का हो जाएगा
देख लीजिएगा इस धरती पर स्वर्ग उतर आएगा। 🌐
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
Tuesday, May 5, 2026
टिप्पणी : बड़ा कवि
बड़े कवि जब छोटे कवि की उपेक्षा करने लगें तो समझें उनकी कविता पेड़से टूट कर ज़मीन पर गिरने लगी।
• गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
