यह तो चाहा था जीवन भर प्यार मिले
लेकिन ऐसा,यह तो नहीं कि,पहाड़ मिले।
▪️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Tuesday, June 30, 2026
दो पंतिया : यह तो चाहा था जीवन भर...
Wednesday, June 24, 2026
किसी किसी शे'र का वर्तमान
बा-रब्त भी नहीं है बे रब्त भी नहीं है ज़ालिम की गुफ़्तगू में अंदाज़ है ग़ज़लका।
(ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ)
🍂
कृपया,
मौजूदा राजनीति से इसका कोई संबंध न पढ़ें-देखें। #उचितवक्ताडे.
उपलब्धि !
Friday, June 19, 2026
अफ़सोस !
पुरुष होने के आयाम
Wednesday, June 17, 2026
अपना देश !
🌐... अपना देश !
📕
यह बहुत ही दिलचस्प है कि राजनीति में हर एक विपक्षी पार्टियों को सत्तासीन राजनीतिक पार्टी तानाशाह और अन्यायी लगती है। प्राय: १९६६-६७ ई.से ही मैं यह देखता आ रहा हूंँ।
अवांँछित सत्ता की अपरिहार्य प्रतिरोधी ज़िद में मुझे,स्वतंत्र भारत का अपना पहला ही वोट किसी दूसरे वोटर के नाम पर डालना पड़ा था ! ध्यान रहे,
स्वतंत्र भारत में एक युवा नागरिक का-
मेरा पहला वोट दूसरे वोटर के नाम पर!
बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री के. बी.सहाय जी थे।
🔥
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
