। आकाशवाणी-समय. ।
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क्या ही अनूठा समय था अपने इस
आकाशवाणी का! साहित्य,संगीत,शिक्षण- संस्कृति से भरपूर इसमें कुछ तो पहले से ही समाज में प्रतिष्ठित हो चुके कवि-कलाकार आते थे परन्तु बहुत-से लोग रेडियो में आ जाने के बाद बन जाते थे।
आज सुनते हैं कि प्रायः दोनों में से कुछ नहीं होता फिर भी आकाशवाणी
बुलन्द है !
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#उवडे.
Wednesday, July 1, 2026
आकाशवाणी-समय
Tuesday, June 30, 2026
ऐसे समय में
🌐 ऐसे समय .
शब्दकोषों में हो जाएँ
पेशेवर कविजन !
विप्लव ज़िद्दी कवि-कलाकार,
कुछ दिनों के लिए भूमिगत होकर ठीक
से करें विचार
क्रांतदर्शी लोग थोड़ा विश्राम कर लें
अभी करें नया पथ आविष्कार ।
नहीं सुरक्षित है अगर यह दुनिया,
समाज तो अलबत्ता तलाश लें कोई
दुर्गम विकल्प कोई
अभेद्य महावन जैसा,जो भी
वहीं करें अपने आख्यानों का
पुनरावलोकन-चिंतन।
दिखने से बेहतर है, लगें ।
इस ज़ालिम वक़्त में यही होगा ठीक-
दिखें नहीं,लगें।
इस काल यही करें
कुछ भी करना है ज्योति-सार्थक
और परिव्याप्त व्यवस्था विरुद्ध.
▪️
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
दो पंतिया : यह तो चाहा था जीवन भर...
यह तो चाहा था जीवन भर प्यार मिले
लेकिन ऐसा,यह तो नहीं कि,पहाड़ मिले।
▪️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Wednesday, June 24, 2026
किसी किसी शे'र का वर्तमान
बा-रब्त भी नहीं है बे रब्त भी नहीं है ज़ालिम की गुफ़्तगू में अंदाज़ है ग़ज़लका।
(ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ)
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कृपया,
मौजूदा राजनीति से इसका कोई संबंध न पढ़ें-देखें। #उचितवक्ताडे.
