Sunday, September 13, 2026
हिन्दी दिवस !
Wednesday, September 9, 2026
शेर नुमा : तर्कीली तुक का तो मैं भी क़ायल हूं
तर्कीली तुक का तो मैं भी क़ायल हूँ, काठ-कसैली तुक से घायल हो जाता हूँ !
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ता.
ग़ज़लनुमा। : मंत्रमुग्ध होना चाहे
🍁
मंत्रमुग्ध होना चाहे
जी उससे मिलना चाहे।
कली मुन्तज़िर है किसके
अधरों पर खिलना चाहे
किससे मिले हुई मुद्दत
किससे दिल मिलना चाहे
वक़्त शिकंजा कसता है
ज़ीस्त नहीं उठना चाहे
एक बराबर ख़िजाँ बहार
खिलना - मुरझाना चाहे
ख़त भर के हर्फ़-ए-मायूस
दफ़्न छुपा रहना चाहे
जवांँ सियासी हल्क़ों में
जानें क्या घटना चाहे
चश्मे नम वक़्त-ए-रुख़्सत
हसरत यह रहना चाहे
🌼
गंगेश गुंजन
#उवडे.
Monday, September 7, 2026
शे'रनुमा कुछ
▪️
१.
पेट खाली हो मगर सीधी रहती है रीढ़
तने ज़मीर सीधा देखते हैं वो जो फ़क़ीर।
२.
बड़े मज़े की लड़ाई थी
दोस्ती पर आ के ख़त्म हुई।
३.
ख़ामुशी की जु़बाँ में उस क़िस्सए ग़म का बयान
चश्म-ए-नम भी बज़्म में देखा है कल रक़ीब को।
🌼 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Sunday, September 6, 2026
उम्मीद का क़द हौसले से बाहर न हो
उम्मीद तो जी भर रक्खें कोई हर्ज नहीं,मगर यह ध्यान भी कि हौसले से बाहर न जायंँ.
💢 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
कल शिक्षक दिवस था
✨। कल शिक्षक दिवस था...
यह बड़ा दिलचस्प है कि शिक्षक दिवस पर सबसे पहले हमें अपनी प्राथमिक कक्षाओं के गुरु जी लोग ही याद आते हैं।जैसे मुझे अपने बरारी हाई स्कूल के भगवान बाबू सर, (गणित), गया बाबू सर (साहित्य और भूगोल) और बनर्जी सर (सामान्य स्वास्थ्य विज्ञान) और इन सबको मिला कर अकेले सर्वज्ञ मेरे गाँव में प्राइमरी स्कूल के मास्साहेब -बुध नारायण बाबू (सभी विषयों के गुरु जी)-श्री बुद्धि नारायण झा मास्साहैब।
उससे भी और रोचक तो यह अनुभव है कि इन श्रद्धा सुमन स्मरण से मैंने जो ये गुरुनाम लिखे हैं,सब के सब प्रायः निर्दय और डरावने ही थे ! लेकिन आश्चर्य कि आज अब वे सभी हृदय से श्रद्धेय और प्रणम्य होकर याद आते हैं.मन ही मन उनके पैरों को छू कर प्रणाम करता हूँ !
💐💐💐💐💐
गंगेश गुंजन #उचितवक्ता.
Friday, September 4, 2026
। कृष्णाष्टमी ।
।कृष्णाष्टमी।
उस सीधी,सरल सन् १९५७ ई.में कहांँ मालूम था कि हमें २०२६ की ऐसीअशान्त कुरूप ईस्वी भी देखनी है..
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Wednesday, September 2, 2026
विडंबना (जीवन दर्शन)
- विडंबना -
मनुष्य को यह जीवन मिलता तो है एक
अनमोल वरदान की तरह लेकिन ऐसे जैसे किसी
शिशु के नन्हे हाथों में धर्मग्रंथ या गीता-ज्ञान की
पुस्तक के समान ।
.📕. गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क
Tuesday, September 1, 2026
मीडिया : मादा बिच्छू
Sunday, August 30, 2026
ग़ज़लनुमा : लगें नहीं कभी हालात सम्भलने वाले
Friday, August 28, 2026
भागलपुर का अली गंज। अलीगंज छोर पर आकाशवाणी भागलपुर का ट्रान्समीटर और स्टूडियो
Monday, August 24, 2026
शे'रनुमा : ग़मगु़सारोंकी भरी महफ़िल में
ग़मगु़सारोंकी भरी महफ़िल में चश्म-ए-नम कहीं,
देखने वाला नहीं दीखा हमें वो दीदावर।
✨ गंगेश गुंजन #उवडे.
Saturday, August 22, 2026
टिप्पणी : दो पंतिया
आहट जुदा-जुदा हो तो दरवाज़ों पर दस्तक-सी लगती हैं। एक साथ बज उठें घरोंकी ज़ंजीरें तो बस्ती भर जग जाती है।. ।•। गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Friday, August 21, 2026
टूट कर इश्क़ किया....: शेरनुमा
टूट कर इश्क़ किया और सो इतना किया कि आस-पास हर घर हमको मंदिर -मंदिर लगने लगा
🌱
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
समाधान बाबू की समस्या
🌼। मित्र समाधान प्रसाद जी का अनुभव !
समाधान बाबू आज फ़रमाने लगे :
‘देखिए कवि जी,पत्नी पत्नी ही होती है और बेटी आख़िर बेटी !’
‘इसमें ऐसा नया क्या है समाधान बाबू जो आप इसे आर्ष वचन बना कर कह रहे हैं?’
मैंने अपनी खीझ दबाते हुए टोका तो बोल उठे :
‘अरे भाई आगे तो सुनिए। आप कवियों में यह भी भारी ऐब है। किसी की सुनना ही नहीं चाहते।खाली अपनी ही सुनाना चाहेंगे।’ वे खीझे।
‘फ़र्माइए,आगे क्या है !’मैंने कहा।
‘सुबह-सुबह आप कोई बात कहें और सामने लोग ठीक से न सुन पाएँ तब ?’
‘तब क्या ? बात ज़रूरी रही तो वह और स्पष्टता और ज़ोर से बोल कर दुहरा देंगे। सिंपल।’ मैने जवाब दिया तो वे पिनक गये-
‘जी नहीं। कहने के लिये आपको पत्नी जी के पास जा कर कहना पड़ेगा ।’
‘तो इसमें भी समस्या क्या हुई ?’ मैंने किसी तरह अपनी खीझ नियंत्रित करके पूछा तो मुझ पर तीर की तरह छूटे। बोले :
‘यही तो। नहीं सुनी जा सकी आपकी वो ही बात बेटी आपके समीप आकर सुनेगी। वह कभी यह नहीं कहेगी कि ‘नहीं सुन पाये सो मेरे नजदीक आकर कहिए।यह क्या आपको साधारण बात लगती है?
यह तो सरासर स्त्री सत्ता के सम्मुख पुरुष सत्ता का घुटने टेकना हुआ…’
अब जाकर समाधान प्रसाद जी की समस्या समझ आई।
🌼🌵🌼
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
लोक गायिका मोहिनी देवी जी
•
फेसबुक पर पिछले दिनों अपने आकाशवाणी एनाउन्सरी ज़माने के एक अतिप्रिय स्मरण प्रसंग का फोटो सहित पोस्ट देख कर अभिभूत हुए बिना न रह सका-लोक गायिका मोहिनी देवी जी का।
आकाशवाणी पटना में मैंने इनका ऑडिशन ही (छुप छुपा कर😆) सुना है। जिसमें मोहिनी जी ग्रेडेड हुईं ! संयोग देखें कि यह वही गाना भी है ! अहा हा ! क्या गला है इनका और क्या गाना ! स्वर की कुछ ऐसी अलग ख़ासियत के कारण उस दिन यह तो आकाशवाणी में एक दमकती हुई ख़बर थीं ! एकदम हट कर लोककंठ और अपूर्व लोक गायिकी !
शाम में गुरुजी से भेंट होती है(बाबू ब्रह्मदेव नारायण जी) आपने बड़े उल्लास से कहा था - ‘आज एक बेहद दुर्लभ आवाज़ मिली है अपने रेडियो लोकगीत को।’…
अब उनको यह कैसे कहते कि हमलोग जानते हैं पर्यावरणीय !’( हम दो तीन जने,जैसा स्मरण आया है-सुषमा शुक्ला जी और इला त्रिपाठी जी ही थीं।) उनके संतोष के लिए ही पूछा-
‘कौन गायक गुरु जी ?’
और मोहिनी जी अभी हैं,यह जान कर और बहुत, बहुत अच्छा लगा।
अभिवादन और स्वागत है आपका !
💢
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
Wednesday, August 19, 2026
अपवाद : धीरोद्धत खलनायक हैं.
धीरोद्धत खलनायक.
[✨]
अपवाद धीरोद्धत खलनायक है। वह किसी मूल्यवान मानवीय विचार को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंँचने ही नहीं देता है।.
🌐 गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
शे'रनुमा। दुःख से दोस्ती
दोस्ती दुःख से क्या कर बैठे
अब तो इसरार पर उतर आया...
🌀
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Sunday, August 16, 2026
आजीवन कारावास मे सुरक्षित
साहित्य और सल्तनत
कभी तो एक दिन सत्ता साहित्य की सहयात्री बनेगी और धरती भर देश अपना-अपना १५ अगस्त मनाएँगे। 🌐
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Thursday, August 13, 2026
दो आज़ाद शे'रनुमा : ग़मगुसारों की भरी महफ़िल
💢
१.
ग़मगु़सारों की भरी महफ़िल में चश्म-ए-नम कहीं
देखने वाला नहीं दीखा हमें वह दीदावर।
२.
जान-ए-महफ़िल भी नहीं जिस शब रही
क़हक़हे थे कम न रक़्श-ए-बज़्म ही बेजान था।
🍁
(दोनों आज़ाद मगर आज एक साथ आमद) गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
Wednesday, August 12, 2026
राजनीति की बाढ़
राजनीति में बारहो महीने बाढ़ आई रहती है। प्रगति की सब फसल पानी में ही फूलती- फलती रहती है। ▪️
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Saturday, August 8, 2026
राजनीति और प्रायश्चित्त...
राजनीति में कोई प्रायश्चित्त -पश्चात्ताप है कि नहीं ????????????????????????? जैसे अब बोफोर्स प्रकरण पर क्या करेगी राजनीति?
|🔥|
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
Thursday, August 6, 2026
शे'रनुमा : इस बदमंज़र में इन्साँ ....
इस बदमंज़र में इन्साँ जीना ही नहीं चाहे
और सियासत ख़ुशमंज़र होने भी नहीं देती। °° गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Wednesday, August 5, 2026
अकेला - अकेली
अकेले खाना खाता हुआ पुरुष करुण लगता रहता है। अकेली भोजन करती हुई स्त्री अपमानित और दयनीय।
▪️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Wednesday, July 29, 2026
कुशल मंगल जानने की बीमारी
दसेक बीमारियों से घिरे ही रहते हैं हम हरदम,
सबों की कुशल-मंगल जानने वाली तो आफ़त है ✨ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
वर्तमान भविष्य
वर्तमान की सब मुश्किलें दिखाई देती हैं,और भविष्य की केवल आसानियांँ।
▪️
गंगेश गुंजन #उवडे.
Tuesday, July 28, 2026
अभिशप्त शब्दकोश
Saturday, July 25, 2026
शेरनुमा : सियासत ही सियासत है...
सियासत ही सियासत है सब तरफ़ बाज़ार है,
राजनीति रोगी है और राजनितिक सरकार है.
🌩️
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
रंजन कुमार (भागलपुर को सम्बोधित
🕸️
प्रिय भाई रंजन,
मीरा जयन्ती पर अब भागलपुरमें ''मीरा महोत्सव" होता है या नहीं रञ्जन ? मारवाड़ी स्कूल प्राँगण में जो विशाल रूप में होता था। आदरणीय हरिकुञ्ज जी ही थे न सूत्रधार उसके ?
... एक बार तो उसी अवसर और भाईजी डॉ.बेचन जी की अनुकम्पा से मुझ पर भारी विपदा आन पड़ी थी। जयन्तीक समारोह में उस रात कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे माननीय सांसद भागवत झा आज़ाद जी। संचालन -डॉ.बेचन। मैं (किसी स्वाभिमान जन्य कारणसे 'सविनयअवज्ञा' पूर्वक सामान्य श्रोता वृन्द के साथ विशाल पांडाल में बैठा था। बेचन जी मुझे लगातार मञ्च पर आकर बैठने का आह्वान कर रहे थे और मैं आदरपूर्वक अनसुना किए जा रहा था।उधर डॉ बेचन जी को श्रोताओं में से मेरे लिए पर्चियांँ आ रही थीं।अवश्य ही युवाओं के आग्रह से। मंच से इसके हवाले से भी मुझे बुलावे आ रहे थे।मैं आदरपूर्वक मंच पर जाना टाले जा रहा था। डॉ बेचन जी ने किंचित खीझ के साथ ही आखिर मुझ पर रामवाण की तरह छोड़ दिया। बोले -'सभा के अध्यक्ष,आज़ाद जी का आग्रह है कि गुंजन जी मञ्च पर आकर बैठें।.’...
उसके बाद का दृश्य जो वहाँ हुआ वो तो 'जो हम जानते हैं हमीं जानते हैं'।वह धर्मसंकट काल ! ऊपर से आज़ाद जी उन दिनों मुझसे नाराज़ चल रहे थे। क्यों यह तो पता नहीं।...लेकिन सो यादें फिर कभी।
लगभग यही घटना टीचर्स ट्रेनिंग स्कूल हॉल के आयोजन में हो गयी।उसमें तो मुझे सभाध्यक्ष आ. चाँद मिसिर जी की भी 'सविनय अवज्ञा' करनी पड़ी थी। प्रसंग देवेन्द्र जी सुधाकर जी के एक साहित्यिक आयोजन का था शायद। उन दिनों मेरे ये दोनों प्रिय अग्रज भी भागलपुर में मेरे ‘बाहरी आदमी’ होने की प्रच्छन्न मुहिम चला रहे थे…🤔। उस आयोजन में मुझे विधिवत् काव्यपाठ का आमंत्रण कार्ड नहीं भेजा था। कार्ड भर भेजा था। सो कवि के स्वाभिमान में मैं,काव्य पाठ करने को तैयार नहीं हुआ और वहाँ भी जे.चन्द्रशेखर (चाँद मिसिर जी ) जैसी मेरे इतने आत्मिक शुभेच्छु तक को नाराज़ करना पड़ा था…।
संभव हुआ तो कभी कहने का मन है मेरा... आप थे कि नहीं रञ्जन उस रात वहाँ मारवाड़ी स्कूल प्रांगण के ‘मीरा महोत्सव में ? तब मेरे युववाणी के बहुत से युवा तो उपस्थित थे वहाँ। युवा तुर्क दिवाकर विद्रोही,संतोष प्रीतम तो सद्य: याद आ रहे हैं। आज के प्रोफेसर अमरेन्द्र तब मेरी युववाणी के स्टार शाइर 'अमरेन्द्र घायल' हुआ करते थे और कुमार भागलपुरी तो भागलपुरी ही रहे।रामावतार राही जी(दुःखद कि अब नहीं हैं )।राही शंकर ,
'कैक्टस' साहित्यिक पत्रिका के सम्पादक पुराने मेरे मित्र तो सुविधा पूर्वक उस मंच पर आसीन ही थे वहाँ। आज भी यह सवाल मन में है ही और इस बात का दुःख भी कि मुझे ही ‘वहाँ मुझे, मुझे भागलपुर में, बाहरी आदमी माना गया …और सो अपने ही आत्मीय समानधर्मी लेखक मित्रों द्वारा भी…
होली की शुभकामनाएंँ भागलपुर ।
▪️
[आपको सम्बोधित यह पत्र मैंने कभी आपको भेजा था वह मिला था या कितने ही मेरे ऐसे लिखे आर्काइव में ही दम तोड़ते हुए में शामिल रह गये? फाईलों में आज दिख गया तो इसी शक में भेज रहा हूंँ। सस्नेह,]
-गंगेश गुंजन।
17.01.2017.
Friday, July 24, 2026
.यहाँ ...
• यहाँ.
▪️
कुछ प्रोफेसर टाइप प्रबुद्धों को लगता है मानो अवकाश प्राप्ति के बाद भी वे क्लास में छात्र पढ़ा रहे हैं। कुछ एक तो फेसबुक पर भी अनवरत
समुपलब्ध हैं। परन्तु
यहीं पर कुछेक प्रोफ़ेसर यदि फेसबुक पर लिखना छोड़ दें तो हम जैसे कितने ही फेसबुकिए फेसबुक को ही छोड़ दें।
विशद सामाजिक जीवन में मनुष्य की ऐसी ही कुछ रोमांँचक चुनौतियांँ भी हैं जिनमें चकित और अकस्मात् प्रेरित कर देने वाले कितने ही अवसर भी झलकते हैं !
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Tuesday, July 21, 2026
टिप्पणी : कुछ शब्द आजकल...
📕 कुछ शब्द आजकल,
आदमी के होंठों पर आते ही या,क़लम से काग़ज़ पर उतरते ही राजनीति बन जाते हैं,चाहे वे कितने ही स्वच्छ हृदय से कहे-लिखे गए ही क्यों न हों।
🌘 गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
उधो,ब्रज मोहि बिसरत नाही... भागलपुर बाल स्मृति
📘 उधो,ब्रज मोहि बिसरत नाहीं…
भागलपुर : बाल-स्मृति और स्वतंत्रता का
पहला बोध।
•
भागलपुर मेरे जीवन में क्या है,मैं आज भी पूरी तरह नहीं समझ पाता। उलझन में ही रह जाता हूँ। आज फिर अचानक उसकी एक स्मृति मन में उभर आई। तब हम लोग बरारी में रहते थे। ठीक गंगा किनारे की बंगला कोठी में। वहीं पास ही कारकंपनी जहाज़ घाट भी था।बाबू जी ने हमें वहीं गंगा में तैरना भी सिखाया था।
एक दिन माँ ने कहा कि मेरी किन्हीं बहन के पति अर्थात मेरे बहनोई बहुत दिनों के बाद जेल से छूट कर आए हैं और हमलोग उनसे मिलने जाना चाहिए। जेल से छूट कर? उस समय मेरे बाल मन में जेल का अर्थ बस यही था कि जेल में तो चोर बन्द करके रखे जाते हैं । खाली चोर। डाकू नहीं। क्योंकि चोर पर गुस्सा जाय तो उल्टे डाकू ही पुलिस को पकड़कर ले जाता है। डाकू को तो पुलिस पकड़ ही नहीं सकती। पुलिस उतना ताकतवर नहीं होती। डकैत ही सबसे बहादुर होता है,ऐसी हमारी बाल धारणा थी।तब हत्या जैसे अपराधों की दुनिया का तो हमें कोई ज्ञान ही क्या होता,नहीं था।
आज सोचता हूंँ तो यह भी लगता है कि शायद तब चोरी के अलावा बुरी घटनाएं और होती भी कहां थीं। डकैती को तो हम बच्चे बहादुरी ही मानते थे। इसलिए मन में सवाल उठा —मेरे संबंधी चोर कैसे हो सकते हैं?’ बाल अभिमान को भी धक्का लगा…
माँ,मेरे बड़े भाई,मैं और दो बहनें पांँव पैदल चल कर ही उनसे मिलने गए। तब रिक्शा आदि का कोई चलन था भी कहां। यों बरारी बस्ती का यह इलाका हमारी बँगलाकोठी से था भी नज़दीक ही। दोपहर का समय रहा होगा। पहुंँचे तो वहाँ बाहर के बरामदे में बिना कंबल दरी की खाली चौकी पर एक गोरे गोरै धोती पहने एक सज्जन पालथी मारकर बैठे थे।उनके आसपास बैठे लोग आदरपूर्वक बहुत ध्यान से उनसे बातें कर रहे थे। मां को देखते ही वे उठे और पैर छूकर प्रणाम किया। फिर मां आंगन तरफ़ चली गईं। जाते-जाते मैंने सहमे सहमे हुए ही उन्हें बड़े गौर से देखा। मुझे तो उनमें चोर जैसा कुछ खास नहीं लगा। वे तो एकदम और लोग जैसे ही लग रहे थे। बाद में माँ ने बताया कि छोटा लड़का, बुद्धी (बुद्धिनाथ झा, और बड़ा, भोला, दोनों तुम्हारे भांँजे हैं। यह बात मेरे लिए और आश्चर्य की थी क्योंकि वे लगभग मेरी ही उम्र के और दूसरे मुझसे बड़े थे। हमारे बरारी हाई स्कूल में ही पढ़ते थे।तब जान पहचान नहीं थी।
बाद के वर्षों में उनसे आनंदगढ़ के भोज के अवसरों पर मुलाकात होती रही।आनन्द गढ़ में बहुत भोज हुआ करता था। पर भांजों से हम दोनों भाइयों की निकटता अधिक नहीं बन सकी।
घर लौटकर भी मेरे मन का सवाल शांत नहीं हुआ। एक दिन मैंने किसी बड़े से धीरे से पूछ ही लिया, "उन्होंने क्या चोरी की थी जो जेल गए थे?" वे मुस्कराए और बोले, "अरे, वे चोर नहीं थे। वे तो स्वतंत्रता संग्राम में ,बयालिस के आंदोलन में बिजली तार तोड़ने पोस्ट आफिस स्टेशन सब जलाने गए थे।सो अंगरेज ने उन्हें जेल में बन्द कर दिया था। वे स्वतंत्रता संग्रामी हैं।" मुझे तब समझ में आया कि जेल सिर्फ अपराधियों के लिए नहीं होती। देश की आज़ादी के लिए लड़ने वाले लोग भी जेल जाते हैं और समाज उन्हें बहुत अच्छा मानता है। उस दिन मुझे पहली बार समझ में आया कि स्वतंत्रता सेनानी का मतलब क्या होता है।आज सोचता हूँ कि एक बच्चा अपने समय की कितनी बड़ी घटनाओं को कितना सीमित रूप में समझ पाता है। इतिहास उसके सामने घट रहा होता है,पर उसकी समझ और अनुभव अभी वहाँ तक पहुँचे नहीं होते। अगर वे हमारे जीजा कहीं हों और मेरी उस बाल धारणा को सुन रहे हों,तो वे अवश्य मुझे क्षमा करेंगे।मैं बच्चा था; मैं क्या जानता कि जेल जाना कभी-कभी गौरव की भी बात हो सकती है।
आज न जाने क्यों भागलपुर फिर याद आ गया। वहाँ की और भी अनेक स्मृतियाँ हैं,अनेक बाल मित्र हैं जो बार-बार याद आते हैं। कई बार लिखने का मन होता है,परअवसर या मनःस्थिति साथ नहीं देती। आज लगा कि कहीं न कहीं से शुरुआत तो करनी ही चाहिए…। और एक बात कुछ दिन पहले भी मैंने भागलपुर पर काफी कुछ बोल कर टाईप करबाया था एआई से। पर उसे सुरक्षित करने की विधि मुझे नहीं मालूम थी।सो नहीं सुरक्षित कर सके…।
तब के अपने परम दोस्त सहपाठी का मन रखने के लिए जोखिम उठा कर चल रहे क्लास के बीच ही मुझसे क्या हुआ था कि पढ़ा रहे गया बाबू सर ने भरे क्लास मुझे अजीब-सी ही नई -
नई सज़ा दी थी…
बाल मित्र पंडित जी को याद भी होगा कि उसकी ख़ुशी के लिए मैंने जैसी सज़ा पाई कि महीनों दोस्त लोग मुझ चिढ़ाते रहे….😅।
अब सोचता हूंं कभी मिले तो अपने उस बाल सखा अब बड़े चित्रकार पंडित जी से पूछूँ-
‘भले आदमी तुम्हें याद भी है तुम्हारे कारण मुझे मिली वह सज़ा ?’
साल दो साल पहले तक मित्र डॉ रणजीत साहा जी रतन मोहन के बारे में बताया करते थे।वह भी संपर्क में नहीं के बराबर हैं।
पिछ्ले दिनों भागलपुरी प्रिय अनुज मित्र रंजन कुमार से यह जान कर बहुत तसल्ली हुई कि पंडित जी स्वस्थ सानन्द हैं और बरारी के मेरे प्रिय जनार्दन जी सर्राफ उर्फ जन्नू भी ! ख़ुश रहो साथियो !
काश !
अब एक बार कभी भागलपुर जाता... !
▪️
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
Sunday, July 19, 2026
शे'रनुमा : सारे गीत लिखे जा चुकते हैं...
सारे गीत लिखे जा चुकते हैं जीवन के, अन्तिम प्रेमगीत बच ही जाता है लिखना.. 🌱
गंगेश गुंजन. #उचितवक्ताडेस्क.
Thursday, July 9, 2026
अब का पटना
🌐 अब का पटना !
🕸️
कदम कुआँ पटना में ऐन निताई कैफ़े और उसके बायें पेट्रोल पंप के सामने कदम कुआँ पटना में एक धर्मशाला हुआ करती थी जिसका नाम ‘दैवज्ञ धर्मशाला’ था।अब कोई कह सकेगा उसके बारे में ?
भैया के साथ राँची जाने के रास्ते में हम सब पहली बार पटना की इसी धर्मशाला में रात भर के लिए ठहरे थे। दूसरी सुबह गांँधी मैदान से बस में राँची गये थे।सन् १९५४-५५ ई.का तो रहा ही होगा…जहांँ तक याद है बिहार राज्य पथ परिवहन की बस सेवा तभी अस्तित्व में थी…
•
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
मैं,वही सौतार !
Wednesday, July 8, 2026
टिप्पणी : सम्बन्ध का हेतुहेतुमद्भूत ...
Sunday, July 5, 2026
इस गहन धुंधलके में
Wednesday, July 1, 2026
आकाशवाणी-समय
। आकाशवाणी-समय. ।
🌀
क्या ही अनूठा समय था अपने इस
आकाशवाणी का! साहित्य,संगीत,शिक्षण- संस्कृति से भरपूर इसमें कुछ तो पहले से ही समाज में प्रतिष्ठित हो चुके कवि-कलाकार आते थे परन्तु बहुत-से लोग रेडियो में आ जाने के बाद बन जाते थे।
आज सुनते हैं कि प्रायः दोनों में से कुछ नहीं होता फिर भी आकाशवाणी
बुलन्द है !
🍁🍁
#उवडे.
Tuesday, June 30, 2026
ऐसे समय में
🌐 ऐसे समय .
शब्दकोषों में हो जाएँ
पेशेवर कविजन !
विप्लव ज़िद्दी कवि-कलाकार,
कुछ दिनों के लिए भूमिगत होकर ठीक
से करें विचार
क्रांतदर्शी लोग थोड़ा विश्राम कर लें
अभी करें नया पथ आविष्कार ।
नहीं सुरक्षित है अगर यह दुनिया,
समाज तो अलबत्ता तलाश लें कोई
दुर्गम विकल्प कोई
अभेद्य महावन जैसा,जो भी
वहीं करें अपने आख्यानों का
पुनरावलोकन-चिंतन।
दिखने से बेहतर है, लगें ।
इस ज़ालिम वक़्त में यही होगा ठीक-
दिखें नहीं,लगें।
इस काल यही करें
कुछ भी करना है ज्योति-सार्थक
और परिव्याप्त व्यवस्था विरुद्ध.
▪️
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
दो पंतिया : यह तो चाहा था जीवन भर...
यह तो चाहा था जीवन भर प्यार मिले
लेकिन ऐसा,यह तो नहीं कि,पहाड़ मिले।
▪️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Wednesday, June 24, 2026
किसी किसी शे'र का वर्तमान
बा-रब्त भी नहीं है बे रब्त भी नहीं है ज़ालिम की गुफ़्तगू में अंदाज़ है ग़ज़लका।
(ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ)
🍂
कृपया,
मौजूदा राजनीति से इसका कोई संबंध न पढ़ें-देखें। #उचितवक्ताडे.
उपलब्धि !
Friday, June 19, 2026
अफ़सोस !
पुरुष होने के आयाम
Wednesday, June 17, 2026
अपना देश !
🌐... अपना देश !
📕
यह बहुत ही दिलचस्प है कि राजनीति में हर एक विपक्षी पार्टियों को सत्तासीन राजनीतिक पार्टी तानाशाह और अन्यायी लगती है। प्राय: १९६६-६७ ई.से ही मैं यह देखता आ रहा हूंँ।
अवांँछित सत्ता की अपरिहार्य प्रतिरोधी ज़िद में मुझे,स्वतंत्र भारत का अपना पहला ही वोट किसी दूसरे वोटर के नाम पर डालना पड़ा था ! ध्यान रहे,
स्वतंत्र भारत में एक युवा नागरिक का-
मेरा पहला वोट दूसरे वोटर के नाम पर!
बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री के. बी.सहाय जी थे।
🔥
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
Tuesday, June 16, 2026
दो पँतिया : हरेक सिम्त घुंटन...
हरेक सिम्त क़दम-क़दम घुंटन और फ्रस्टेशन,
कैसे रहते हैं इसमें,निकलें कुछ करें भी जवाब!
🕸️ गंगेश गुंजन
#उवडे.
Monday, June 15, 2026
दो पँतिया : शिकायत सूरज की...
शिकायत सूरज की और सो आसमांँ से, यह क्या है तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है!
.
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
Friday, June 12, 2026
दो पंतिया : दुःख को लोग बुरा...
दुःख को ख़ामख़्वाह कहते हैं लोग बुरा।
इसी की नेमत तो दोस्त हैं और अपने ! ✨
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Thursday, June 11, 2026
ग़ज़लनुमा
Wednesday, June 10, 2026
टिप्पणी : विशेष होने का एहसास
सबसे हटकर होने का आत्मविश्वास किस क़दम पर आपका अहंकार बन जाता है, आपको यह पता भी नहीं चलता.
विशेष होने के लिए मनुष्य को सामान्य रहना पड़ता है।
गंगेश गुंजन। #उचितवक्ताडे.
Thursday, June 4, 2026
पटना का वह ऐतिहासिक "युवालेखक सम्मेलन -१९७२?
Tuesday, June 2, 2026
शहर में वाचाल
।🌻। शहर में वाचाल 🌱
इधर के इतिहास में शायद यह पहली बार है कि तमाम ग्लैमर और चैनेल के सामने एक शिक्षक चुनौती बन कर खड़ा हो गया है और उन सबके क़द से ऊंँचा दिखने लगा है।बौखलाहट में हकला रहे हैं- वाचाल।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
Saturday, May 30, 2026
दू पंतिया : सत्य बजै मे ड'र
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सत्य बजै मे हमरा कोनो ड’र नहिं अछि
ड’र तंँ अछि जे सत्य अपने ने नठि जाय।
🌀
-------------गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.-------------------
Friday, May 29, 2026
दो पंतिया : सभी अकेले हैं अपने-अपने घर में
सभी अकेले हैं अपने-अपने घर में
कहे तो कोई वह नहीं है किसी डर में।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Thursday, May 28, 2026
ग़ज़लनुमा : दिल कुछ ऐसा अफ़साना लिख
Tuesday, May 26, 2026
दो पंतिया : शब-ए-जुदाई भी जश्न-ए-उल्फ़त
शब-ए-जुदाई भी जश्ने उल्फ़त कर गया था.
अजब अदासे कोई आके मुझमें मर गयाथा
🍁 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क .
ग़ज़लनुमा :
📒।
ग़ज़लनुमा
▪️
जीवन गाना रोना है
दुनिया खेल-खिलौना है
तिरी तरह ही ओ साथी
एहसांँ तिरा सलोना है
गर्दिश से शादी जो की
आज उसी का गौना है
क़द पर अपने मत इतरा
वक़्त तुझे भी ढोना है
किस करतूत प' हंँसता है
तू कम कौन घिनौना है
भूल नहीं पाता है दिल
दुःख में शब्द पिरोना है
उनका यूंँ इतना हंँसना
गुंजन जी का रोना है
•
गंगेश गुंजन #उव.📒।
०२.०३.'११.
Sunday, May 24, 2026
ग़ज़लनुमा : मिलते ही मुस्करा देना
Saturday, May 23, 2026
दो पंतिया : अजनबी
अजनबी दु:ख-सुख के नयों का यह ज़माना है, पुरानो ! सहो, समझो इसी में गर जीना है।
🍂
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Thursday, May 21, 2026
दो। दो पंतिया तिया
•। 🌐 ।•
दु:ख ही आए तो कुछ नया आए
बार - बार एक वो ही क्या आए
*
हम कोई डरते नहीं हैं ग़म से
चाहते हैं कि कोई नया आए
*
गंगेश गुंजन #उवडे.
Wednesday, May 20, 2026
दो पंतिया : करे अब मोहब्बत का ज़िक्र भी कौन
Monday, May 18, 2026
हे फेसबुक तुझे सलाम !
🌐
अपनी-अपनी मूढ़ता-मूर्खताओं के साथ,अपनी-अपनी मान्यताओं,विचार और विद्वत्ताओं के साथ स्वतंत्रतापूर्वक निर्भय जीने विचरने की सबजन सुलभ
ऐ प्यारे स्वैच्छिक लोकतंत्र की बस्ती- फेसबुक !
तुझे सलाम !!
❄️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
Sunday, May 17, 2026
Saturday, May 16, 2026
फेसबुक बुद्धिजीवी कमाल !
निरे बकवास को भी मूल्यवान विचार मान कर 'वाह-वाह' करने का यह फेसबुकिया बुद्धिजीवी-काल भी,कमाल है !
🌐 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
टिप्पणी : कुछ बड़े कवि साहित्यकार
साहित्य का वानप्रस्थ !
🌼 ‘साहित्य का वानप्रस्थ’
🍂🍂
साहित्य का भी वानप्रस्थ होता है।इसका अपना ही द्वन्द्वात्मक भौतिकतावाद है। रोज़ाना दुनियावी घटना-परिघटनाओं से सूचना वंचित इसकी चिन्ताएँ एवं अशान्तियाँ भी अलग हैं।
। 🌐।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
Wednesday, May 13, 2026
दो पंतिया : चाहते थे उधरसे ही जाएँ,..
Monday, May 11, 2026
रचनाकार की ख़्वाहिश
▪️
रचनाकार की यह ख्व़ाहिश होती ही है कि उसका लिखा पढ़ते हुए पाठक को कोई और याद नहीं आए यहांँ तक कि कबीर और निराला भी। और जो याद आए ही तो फिर यूंँ आए जैसे वह,किसी बहुत परिचित सफ़र के पुराने पड़ाव से आगे चला जा रहा है। ▪️
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
Sunday, May 10, 2026
राजनेता का रिरियाना...
टिप्पणी
Saturday, May 9, 2026
व्यंग्य दूपंतिया :
Friday, May 8, 2026
दो पंतिया : सब के दुःख एक
जिस दिन बस्ती भर का दुःख बस्ती भर का हो जाएगा
देख लीजिएगा इस धरती पर स्वर्ग उतर आएगा। 🌐
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
Tuesday, May 5, 2026
टिप्पणी : बड़ा कवि
बड़े कवि जब छोटे कवि की उपेक्षा करने लगें तो समझें उनकी कविता पेड़से टूट कर ज़मीन पर गिरने लगी।
• गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
Sunday, May 3, 2026
दो पंतिया : साहिल को भी रोज़ इम्तिहाँ..
Thursday, April 30, 2026
दो पंतिया : भूलते भी रहे सब को...
Monday, April 27, 2026
जीवन के फेसबुक पर
🌐
जीवन के फेसबुक पर ऐसी कितनी ही बड़ी और गूढ लगती हुई बातें दिखती रहती हैं जो वास्तव में उतनी होती भी नहीं हैं। लेकिन किसी बड़े नामी कलम से निकली हैं।
सभी बड़े लगते हुए नाम सदैव आदर और अनुकरणीय ही नहीं होते।
📕। गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
Sunday, April 26, 2026
आम आम बनाम सुख और सुख (टिप्पणी)
Saturday, April 25, 2026
दो पंतिया : बेवजह भी नहीं लगता
Thursday, April 23, 2026
शे'रनुमा : किसी के ज़ख़्म का...
किसी के ज़ख़्म का निशान पाँवों में लेकर
किसी की रूह में कब से न चल रहे हैं हम।
🍁🍁
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Wednesday, April 22, 2026
बादल चन्द्रमा और प्रेम !
दो पंक्तियां : प्यार और आदर
Monday, April 20, 2026
टिप्पणी : ईमानदार बेईमान
शेरनुमा। मृत्यु से डर-डर के हम
Sunday, April 19, 2026
Thursday, April 16, 2026
दो पंतिया : दोस्ती है, दुश्मनी है...
Wednesday, April 15, 2026
Thursday, April 9, 2026
सब राजनीति
Wednesday, April 8, 2026
टिप्पणी : लेखक लेखक!
Tuesday, April 7, 2026
शे'रनुमा : ग़ायब हैं अथवा इन्सान
लिखते-पढ़ते ही रह करके भी क्यूँ ना जीया जाए जब दुनिया भर की राजनीति से ग़ायब हैं इन्सान-अवाम अब !
गंगेश गुंजन #उवडे .
Monday, April 6, 2026
टिप्पणी टकिया पुरस्कार
‘टकिया' 'पुरस्कार’ बेसी काल ओइ प्रतिभाक पँचकठिये साबित होइत छैक।✨
गंगेश गुंजन , #उचितवक्ता.
जीवन युद्ध !
. युद्धों की महाभूमि : जीवन !
❄️
मनुष्य के दो बड़े जीवन-युद्धों के मैदान
दुनिया भर एक समान नहीं हैं।
बेरोज़गारी की लड़ाई और मनुष्य की
स्वतंत्रता का संग्राम सर्वथा भिन्न मैदानों
में और अलग-अलग हथियारों से लड़े
जाते हैं ।
।📕।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
Friday, April 3, 2026
दो पंक्तियां : होते-होते मैं भी पागल...
होते-होते मैं भी पागल हो जाऊँगा क्या
ऐसी दुनिया में ही जीने लग जाऊँगा क्या?
गंगेश गुंजन
Thursday, April 2, 2026
दो पंक्तियां :
समृद्ध लोगों का स्वास्थ्य अक्सर, अनगिन लोगों के लहू से दमकता है.
💢 गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
Sunday, March 29, 2026
शे'रनुमा : जिस्म के जर्जर मक़ाँ में रह लिए
Friday, March 27, 2026
दो पंतिया : अभी तो...
अभी तो खु़शी की छोटी-सी चाहत पर भी दिल टोके।
बहुत कुछ जान भी जाऊंँ तो उनका क्या करूँगा अब !
. ▪️ गंगेश गुंजन #उवडे.
Wednesday, March 25, 2026
Tuesday, March 24, 2026
Monday, March 23, 2026
❄️ पानी पर तेल : विश्व और युद्ध !
❄️ पानी पर तेल : विश्व और युद्ध !
हमलोग तो दशकों से पढ़ते-सुनते आ रहे हैं किअगले विश्वयुद्ध का खतरा पानी को लेकर है। लेकिन यह क्या ? अब तो लक्ष्य ‘तेल’ बन गया -सा लगता है। तो क्या अब यह युद्ध तेल के मुद्दे पर होने की तरफ़ जाने वाला है ?
#उवडे.
Thursday, March 5, 2026
चरिपंतिया
बहुत कम भ’ रहल छै आनन्दक सृष्टि सुख सुविधेक उत्पादन सँ भरि गेल पृथ्वी
ख़ुशीक मार्केट मे मन्दी चलि रहल अछिब्लैक मे भेटि रहल छनि जनिका भेटै छनि। गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Saturday, February 28, 2026
दू पँतिया। किस अनजाने दुःख को जीने
श'रनुमा
Friday, February 27, 2026
एक दो पंतिया
दो दूपंतिया
Wednesday, February 18, 2026
ख़ुश ख़बरें। दो पंतिया
Wednesday, February 11, 2026
नीति अनीति के तर्क
प्रजा वार्त्ता
कुछ दोहे
Saturday, February 7, 2026
प्यार में आसान : मर जाना
|🔥
प्यार में कठिन से कठिन काम किया जा सकता ह और होता भी है। लेकिन इसमें ज्यादातर लोग को मर ही जाना आसान लगता है..
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
