दुःख को ख़ामख़्वाह कहते हैं लोग बुरा।
इसी की नेमत तो दोस्त हैं और अपने ! ✨
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
दुःख को ख़ामख़्वाह कहते हैं लोग बुरा।
इसी की नेमत तो दोस्त हैं और अपने ! ✨
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
सबसे हटकर होने का आत्मविश्वास किस क़दम पर आपका अहंकार बन जाता है, आपको यह पता भी नहीं चलता.
विशेष होने के लिए मनुष्य को सामान्य रहना पड़ता है।
गंगेश गुंजन। #उचितवक्ताडे.
।🌻। शहर में वाचाल 🌱
इधर के इतिहास में शायद यह पहली बार है कि तमाम ग्लैमर और चैनेल के सामने एक शिक्षक चुनौती बन कर खड़ा हो गया है और उन सबके क़द से ऊंँचा दिखने लगा है।बौखलाहट में हकला रहे हैं- वाचाल।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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सत्य बजै मे हमरा कोनो ड’र नहिं अछि
ड’र तंँ अछि जे सत्य अपने ने नठि जाय।
🌀
-------------गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.-------------------
सभी अकेले हैं अपने-अपने घर में
कहे तो कोई वह नहीं है किसी डर में।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
शब-ए-जुदाई भी जश्ने उल्फ़त कर गया था.
अजब अदासे कोई आके मुझमें मर गयाथा
🍁 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क .
📒।
ग़ज़लनुमा
▪️
जीवन गाना रोना है
दुनिया खेल-खिलौना है
तिरी तरह ही ओ साथी
एहसांँ तिरा सलोना है
गर्दिश से शादी जो की
आज उसी का गौना है
क़द पर अपने मत इतरा
वक़्त तुझे भी ढोना है
किस करतूत प' हंँसता है
तू कम कौन घिनौना है
भूल नहीं पाता है दिल
दुःख में शब्द पिरोना है
उनका यूंँ इतना हंँसना
गुंजन जी का रोना है
•
गंगेश गुंजन #उव.📒।
०२.०३.'११.
अजनबी दु:ख-सुख के नयों का यह ज़माना है, पुरानो ! सहो, समझो इसी में गर जीना है।
🍂
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
•। 🌐 ।•
दु:ख ही आए तो कुछ नया आए
बार - बार एक वो ही क्या आए
*
हम कोई डरते नहीं हैं ग़म से
चाहते हैं कि कोई नया आए
*
गंगेश गुंजन #उवडे.
🌐
अपनी-अपनी मूढ़ता-मूर्खताओं के साथ,अपनी-अपनी मान्यताओं,विचार और विद्वत्ताओं के साथ स्वतंत्रतापूर्वक निर्भय जीने विचरने की सबजन सुलभ
ऐ प्यारे स्वैच्छिक लोकतंत्र की बस्ती- फेसबुक !
तुझे सलाम !!
❄️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
निरे बकवास को भी मूल्यवान विचार मान कर 'वाह-वाह' करने का यह फेसबुकिया बुद्धिजीवी-काल भी,कमाल है !
🌐 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
🌼 ‘साहित्य का वानप्रस्थ’
🍂🍂
साहित्य का भी वानप्रस्थ होता है।इसका अपना ही द्वन्द्वात्मक भौतिकतावाद है। रोज़ाना दुनियावी घटना-परिघटनाओं से सूचना वंचित इसकी चिन्ताएँ एवं अशान्तियाँ भी अलग हैं।
। 🌐।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
▪️
रचनाकार की यह ख्व़ाहिश होती ही है कि उसका लिखा पढ़ते हुए पाठक को कोई और याद नहीं आए यहांँ तक कि कबीर और निराला भी। और जो याद आए ही तो फिर यूंँ आए जैसे वह,किसी बहुत परिचित सफ़र के पुराने पड़ाव से आगे चला जा रहा है। ▪️
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
जिस दिन बस्ती भर का दुःख बस्ती भर का हो जाएगा
देख लीजिएगा इस धरती पर स्वर्ग उतर आएगा। 🌐
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
बड़े कवि जब छोटे कवि की उपेक्षा करने लगें तो समझें उनकी कविता पेड़से टूट कर ज़मीन पर गिरने लगी।
• गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
🌐
जीवन के फेसबुक पर ऐसी कितनी ही बड़ी और गूढ लगती हुई बातें दिखती रहती हैं जो वास्तव में उतनी होती भी नहीं हैं। लेकिन किसी बड़े नामी कलम से निकली हैं।
सभी बड़े लगते हुए नाम सदैव आदर और अनुकरणीय ही नहीं होते।
📕। गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
किसी के ज़ख़्म का निशान पाँवों में लेकर
किसी की रूह में कब से न चल रहे हैं हम।
🍁🍁
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
लिखते-पढ़ते ही रह करके भी क्यूँ ना जीया जाए जब दुनिया भर की राजनीति से ग़ायब हैं इन्सान-अवाम अब !
गंगेश गुंजन #उवडे .
‘टकिया' 'पुरस्कार’ बेसी काल ओइ प्रतिभाक पँचकठिये साबित होइत छैक।✨
गंगेश गुंजन , #उचितवक्ता.
. युद्धों की महाभूमि : जीवन !
❄️
मनुष्य के दो बड़े जीवन-युद्धों के मैदान
दुनिया भर एक समान नहीं हैं।
बेरोज़गारी की लड़ाई और मनुष्य की
स्वतंत्रता का संग्राम सर्वथा भिन्न मैदानों
में और अलग-अलग हथियारों से लड़े
जाते हैं ।
।📕।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
होते-होते मैं भी पागल हो जाऊँगा क्या
ऐसी दुनिया में ही जीने लग जाऊँगा क्या?
गंगेश गुंजन
समृद्ध लोगों का स्वास्थ्य अक्सर, अनगिन लोगों के लहू से दमकता है.
💢 गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
अभी तो खु़शी की छोटी-सी चाहत पर भी दिल टोके।
बहुत कुछ जान भी जाऊंँ तो उनका क्या करूँगा अब !
. ▪️ गंगेश गुंजन #उवडे.
❄️ पानी पर तेल : विश्व और युद्ध !
हमलोग तो दशकों से पढ़ते-सुनते आ रहे हैं किअगले विश्वयुद्ध का खतरा पानी को लेकर है। लेकिन यह क्या ? अब तो लक्ष्य ‘तेल’ बन गया -सा लगता है। तो क्या अब यह युद्ध तेल के मुद्दे पर होने की तरफ़ जाने वाला है ?
#उवडे.
बहुत कम भ’ रहल छै आनन्दक सृष्टि सुख सुविधेक उत्पादन सँ भरि गेल पृथ्वी
ख़ुशीक मार्केट मे मन्दी चलि रहल अछिब्लैक मे भेटि रहल छनि जनिका भेटै छनि। गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
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प्यार में कठिन से कठिन काम किया जा सकता ह और होता भी है। लेकिन इसमें ज्यादातर लोग को मर ही जाना आसान लगता है..
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.