।💢। प्रजा वार्त्ता
🌈
संसारी सुख पर सरकारी कर ही हैं भारी-भारी
आनन्दों पर प्रकृति-प्रभु:की ही रहती है पहरेदारी
जनजीवन की ख़ुशी सदा ही स्वप्न रही जेलों में क़ैद
तब थे राजा-महाराजे अब हृदयभंग लोकशाह स्वामी।
🌀
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।

No comments:
Post a Comment