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सरल स्वभाव मनुष्य को निर्बल समझा जाए ।
बन कर ओजस्वी मृदुल अब दिखलाया जाए।
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गुण की नहीं दुकान हो कौशल की नहिं हाट ।
विद्यालय है एक मात्र शिक्षा ही एक बाट।
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जीवन से तो दूर है प्रचलन में अब खाट ।
पर मुहावरे में यहांँ रोज़ खड़ी हो खाट ।
गंगेश गुंजन #उचिवक्ताडेस्क.
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