Monday, May 11, 2026

रचनाकार की ख़्वाहिश

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     रचनाकार की यह ख्व़ाहिश होती ही है कि उसका लिखा पढ़ते हुए पाठक को कोई और याद नहीं आए यहांँ तक कि कबीर और निराला भी। और जो याद आए ही तो फिर यूंँ आए जैसे वह,किसी बहुत परिचित सफ़र के पुराने पड़ाव से आगे चला जा रहा है।                         ▪️ 

                       गंगेश गुंजन 
                   #उचितवक्ताडेस्क.

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