🌼 ‘साहित्य का वानप्रस्थ’
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साहित्य का भी वानप्रस्थ होता है।इसका अपना ही द्वन्द्वात्मक भौतिकतावाद है। रोज़ाना दुनियावी घटना-परिघटनाओं से सूचना वंचित इसकी चिन्ताएँ एवं अशान्तियाँ भी अलग हैं।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।

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