🌼
।। ग़ज़ल नुमा ।।
मिलते ही मुस्कुरा देना
क़त्ल करना,जान लेना
ज़रूरी है ज़िन्दगी में
बाज़ बातें भुला देना
सब पुराना ही ज़माना
है नया ही सब ज़माना
इश्क़ में क्या बादशाहत
जब ग़रज़ हो बुला लेना
था मुझे भी कोई वादा
छुप छुपा ख़त लिखते रहना
अब तो है बस ए’क चर्चा
यह ज़माना वह ज़माना
आह कैसे याद आया
गाँव, कमला* में नहाना
•
*नदी.
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ता डेस्क

No comments:
Post a Comment