Sunday, August 30, 2026
ग़ज़लनुमा : लगें नहीं कभी हालात सम्भलने वाले
Friday, August 28, 2026
भागलपुर का अली गंज। अलीगंज छोर पर आकाशवाणी भागलपुर का ट्रान्समीटर और स्टूडियो
Monday, August 24, 2026
शे'रनुमा : ग़मगु़सारोंकी भरी महफ़िल में
ग़मगु़सारोंकी भरी महफ़िल में चश्म-ए-नम कहीं,
देखने वाला नहीं दीखा हमें वो दीदावर।
✨ गंगेश गुंजन #उवडे.
Saturday, August 22, 2026
टिप्पणी : दो पंतिया
आहट जुदा-जुदा हो तो दरवाज़ों पर दस्तक-सी लगती हैं। एक साथ बज उठें घरोंकी ज़ंजीरें तो बस्ती भर जग जाती है।. ।•। गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Friday, August 21, 2026
टूट कर इश्क़ किया....: शेरनुमा
टूट कर इश्क़ किया और सो इतना किया कि आस-पास हर घर हमको मंदिर -मंदिर लगने लगा
🌱
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
समाधान बाबू की समस्या
🌼। मित्र समाधान प्रसाद जी का अनुभव !
समाधान बाबू आज फ़रमाने लगे :
‘देखिए कवि जी,पत्नी पत्नी ही होती है और बेटी आख़िर बेटी !’
‘इसमें ऐसा नया क्या है समाधान बाबू जो आप इसे आर्ष वचन बना कर कह रहे हैं?’
मैंने अपनी खीझ दबाते हुए टोका तो बोल उठे :
‘अरे भाई आगे तो सुनिए। आप कवियों में यह भी भारी ऐब है। किसी की सुनना ही नहीं चाहते।खाली अपनी ही सुनाना चाहेंगे।’ वे खीझे।
‘फ़र्माइए,आगे क्या है !’मैंने कहा।
‘सुबह-सुबह आप कोई बात कहें और सामने लोग ठीक से न सुन पाएँ तब ?’
‘तब क्या ? बात ज़रूरी रही तो वह और स्पष्टता और ज़ोर से बोल कर दुहरा देंगे। सिंपल।’ मैने जवाब दिया तो वे पिनक गये-
‘जी नहीं। कहने के लिये आपको पत्नी जी के पास जा कर कहना पड़ेगा ।’
‘तो इसमें भी समस्या क्या हुई ?’ मैंने किसी तरह अपनी खीझ नियंत्रित करके पूछा तो मुझ पर तीर की तरह छूटे। बोले :
‘यही तो। नहीं सुनी जा सकी आपकी वो ही बात बेटी आपके समीप आकर सुनेगी। वह कभी यह नहीं कहेगी कि ‘नहीं सुन पाये सो मेरे नजदीक आकर कहिए।यह क्या आपको साधारण बात लगती है?
यह तो सरासर स्त्री सत्ता के सम्मुख पुरुष सत्ता का घुटने टेकना हुआ…’
अब जाकर समाधान प्रसाद जी की समस्या समझ आई।
🌼🌵🌼
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
लोक गायिका मोहिनी देवी जी
•
फेसबुक पर पिछले दिनों अपने आकाशवाणी एनाउन्सरी ज़माने के एक अतिप्रिय स्मरण प्रसंग का फोटो सहित पोस्ट देख कर अभिभूत हुए बिना न रह सका-लोक गायिका मोहिनी देवी जी का।
आकाशवाणी पटना में मैंने इनका ऑडिशन ही (छुप छुपा कर😆) सुना है। जिसमें मोहिनी जी ग्रेडेड हुईं ! संयोग देखें कि यह वही गाना भी है ! अहा हा ! क्या गला है इनका और क्या गाना ! स्वर की कुछ ऐसी अलग ख़ासियत के कारण उस दिन यह तो आकाशवाणी में एक दमकती हुई ख़बर थीं ! एकदम हट कर लोककंठ और अपूर्व लोक गायिकी !
शाम में गुरुजी से भेंट होती है(बाबू ब्रह्मदेव नारायण जी) आपने बड़े उल्लास से कहा था - ‘आज एक बेहद दुर्लभ आवाज़ मिली है अपने रेडियो लोकगीत को।’…
अब उनको यह कैसे कहते कि हमलोग जानते हैं पर्यावरणीय !’( हम दो तीन जने,जैसा स्मरण आया है-सुषमा शुक्ला जी और इला त्रिपाठी जी ही थीं।) उनके संतोष के लिए ही पूछा-
‘कौन गायक गुरु जी ?’
और मोहिनी जी अभी हैं,यह जान कर और बहुत, बहुत अच्छा लगा।
अभिवादन और स्वागत है आपका !
💢
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
Wednesday, August 19, 2026
अपवाद : धीरोद्धत खलनायक हैं.
धीरोद्धत खलनायक.
[✨]
अपवाद धीरोद्धत खलनायक है। वह किसी मूल्यवान मानवीय विचार को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंँचने ही नहीं देता है।.
🌐 गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
शे'रनुमा। दुःख से दोस्ती
दोस्ती दुःख से क्या कर बैठे
अब तो इसरार पर उतर आया...
🌀
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Sunday, August 16, 2026
आजीवन कारावास मे सुरक्षित
साहित्य और सल्तनत
कभी तो एक दिन सत्ता साहित्य की सहयात्री बनेगी और धरती भर देश अपना-अपना १५ अगस्त मनाएँगे। 🌐
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Thursday, August 13, 2026
दो आज़ाद शे'रनुमा : ग़मगुसारों की भरी महफ़िल
💢
१.
ग़मगु़सारों की भरी महफ़िल में चश्म-ए-नम कहीं
देखने वाला नहीं दीखा हमें वह दीदावर।
२.
जान-ए-महफ़िल भी नहीं जिस शब रही
क़हक़हे थे कम न रक़्श-ए-बज़्म ही बेजान था।
🍁
(दोनों आज़ाद मगर आज एक साथ आमद) गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.
Wednesday, August 12, 2026
राजनीति की बाढ़
राजनीति में बारहो महीने बाढ़ आई रहती है। प्रगति की सब फसल पानी में ही फूलती- फलती रहती है। ▪️
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Saturday, August 8, 2026
राजनीति और प्रायश्चित्त...
राजनीति में कोई प्रायश्चित्त -पश्चात्ताप है कि नहीं ????????????????????????? जैसे अब बोफोर्स प्रकरण पर क्या करेगी राजनीति?
|🔥|
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
Thursday, August 6, 2026
शे'रनुमा : इस बदमंज़र में इन्साँ ....
इस बदमंज़र में इन्साँ जीना ही नहीं चाहे
और सियासत ख़ुशमंज़र होने भी नहीं देती। °° गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Wednesday, August 5, 2026
अकेला - अकेली
अकेले खाना खाता हुआ पुरुष करुण लगता रहता है। अकेली भोजन करती हुई स्त्री अपमानित और दयनीय।
▪️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
