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फेसबुक पर पिछले दिनों अपने आकाशवाणी एनाउन्सरी ज़माने के एक अतिप्रिय स्मरण प्रसंग का फोटो सहित पोस्ट देख कर अभिभूत हुए बिना न रह सका-लोक गायिका मोहिनी देवी जी का।
आकाशवाणी पटना में मैंने इनका ऑडिशन ही (छुप छुपा कर😆) सुना है। जिसमें मोहिनी जी ग्रेडेड हुईं ! संयोग देखें कि यह वही गाना भी है ! अहा हा ! क्या गला है इनका और क्या गाना ! स्वर की कुछ ऐसी अलग ख़ासियत के कारण उस दिन यह तो आकाशवाणी में एक दमकती हुई ख़बर थीं ! एकदम हट कर लोककंठ और अपूर्व लोक गायिकी !
शाम में गुरुजी से भेंट होती है(बाबू ब्रह्मदेव नारायण जी) आपने बड़े उल्लास से कहा था - ‘आज एक बेहद दुर्लभ आवाज़ मिली है अपने रेडियो लोकगीत को।’…
अब उनको यह कैसे कहते कि हमलोग जानते हैं पर्यावरणीय !’( हम दो तीन जने,जैसा स्मरण आया है-सुषमा शुक्ला जी और इला त्रिपाठी जी ही थीं।) उनके संतोष के लिए ही पूछा-
‘कौन गायक गुरु जी ?’
और मोहिनी जी अभी हैं,यह जान कर और बहुत, बहुत अच्छा लगा।
अभिवादन और स्वागत है आपका !
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क.

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