आहट जुदा-जुदा हो तो दरवाज़ों पर दस्तक-सी लगती हैं। एक साथ बज उठें घरोंकी ज़ंजीरें तो बस्ती भर जग जाती है।. ।•। गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
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