हाथ में पतवार तो है पर हुई ढीली पकड़,
छोड़ दिया मैंने भी,ले जाये कश्ती धार जहांँ।
° गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Wednesday, September 30, 2026
दो पंतिया : हाथ में पतवार तो है...
Tuesday, September 29, 2026
शेरनुमा। कोई हसरत जो
कोई हसरत रखूँ तो ही न कहीं गिर जाऊँ, कोई तो शख़्स हो सजदे में सर झुका भी सकूँ। 🙏 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे
Thursday, September 24, 2026
शे'रनुमा : अजीब कैफ़ियत है उम्र की देखिए ज़रा
अजीब क़ैफ़ियत है उम्र की देखिए ज़रा, बा'प ही चाहे तवज्जो अपने बेटे से !
🍁 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Sunday, September 20, 2026
शे'रनुमा : दिले हैवान को इन्सान कर दें..
अनुभव और समझ। :
'अनुभव और समझ'
💢
अनुभव और समझ में दादा और पोता का रूपक देखा जा सकता है क्या ? अथवा नाना-नाती का ? ▪️ गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Saturday, September 19, 2026
आभासी संसार की नूतन आत्मरति
🌐
आभासी संसार में 'नूतन आत्मरति'।
🌱🌀🌱
कृपया कहें तो -
फेसबुक आदि पर स्त्री-पुरुष जो भी हों,अगर बार-बार अपनी ही फ़ोटुओं को रस ले-ले कर डालें और लिखते रहें तो इसे एक प्रकार की 'नूतन 'आत्मरति' क्यों न समझा जा सकता है ?
आप क्या सोचते हैं लोगो ?
✨ गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क जिज्ञासा !
Friday, September 18, 2026
हिन्दी आवेश बनाम मैथिली आवेश
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हमारी हिंदी कहती है :
‘आवेश’ में आकर मनुष्य को कोई क़दम नहीं उठाना चाहिए।’
किन्तु मेरी मैथिली तो कहती है :
पहिले डेग उठैत छै मनुखक प्रेमक ककरो 'आवेशे' मे। (अर्थात, प्रेम का पहला क़दम ही मनुष्य का किसीआवेश में ही उठता है 😆)। 📕| गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
Wednesday, September 16, 2026
अस्पताल में मरीज का गाना
इन दिनों फेसबुकादि पर मेरी सक्रियता यूँ समझें कि सरकारी अस्पताल में भर्ती कोई मरीज़ गाना गा रहा है !
🕸️
गंगेश गुंजन. #उचितवक्ताडेस्क।
शेरनुमा : हम तो समझे डूब कर माज़ी में कबके
हम तो समझे डूब कर माज़ी में कब के मर चुके,
कौन है फिर जी रहा है मज़े से इस जिस्म में। 🍁
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे
Sunday, September 13, 2026
हिन्दी दिवस !
Wednesday, September 9, 2026
शेर नुमा : तर्कीली तुक का तो मैं भी क़ायल हूं
तर्कीली तुक का तो मैं भी क़ायल हूँ, काठ-कसैली तुक से घायल हो जाता हूँ !
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ता.
ग़ज़लनुमा। : मंत्रमुग्ध होना चाहे
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मंत्रमुग्ध होना चाहे
जी उससे मिलना चाहे।
कली मुन्तज़िर है किसके
अधरों पर खिलना चाहे
किससे मिले हुई मुद्दत
किससे दिल मिलना चाहे
वक़्त शिकंजा कसता है
ज़ीस्त नहीं उठना चाहे
एक बराबर ख़िजाँ बहार
खिलना - मुरझाना चाहे
ख़त भर के हर्फ़-ए-मायूस
दफ़्न छुपा रहना चाहे
जवांँ सियासी हल्क़ों में
जानें क्या घटना चाहे
चश्मे नम वक़्त-ए-रुख़्सत
हसरत यह रहना चाहे
🌼
गंगेश गुंजन
#उवडे.
Monday, September 7, 2026
शे'रनुमा कुछ
▪️
१.
पेट खाली हो मगर सीधी रहती है रीढ़
तने ज़मीर सीधा देखते हैं वो जो फ़क़ीर।
२.
बड़े मज़े की लड़ाई थी
दोस्ती पर आ के ख़त्म हुई।
३.
ख़ामुशी की जु़बाँ में उस क़िस्सए ग़म का बयान
चश्म-ए-नम भी बज़्म में देखा है कल रक़ीब को।
🌼 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
Sunday, September 6, 2026
उम्मीद का क़द हौसले से बाहर न हो
उम्मीद तो जी भर रक्खें कोई हर्ज नहीं,मगर यह ध्यान भी कि हौसले से बाहर न जायंँ.
💢 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
कल शिक्षक दिवस था
✨। कल शिक्षक दिवस था...
यह बड़ा दिलचस्प है कि शिक्षक दिवस पर सबसे पहले हमें अपनी प्राथमिक कक्षाओं के गुरु जी लोग ही याद आते हैं।जैसे मुझे अपने बरारी हाई स्कूल के भगवान बाबू सर, (गणित), गया बाबू सर (साहित्य और भूगोल) और बनर्जी सर (सामान्य स्वास्थ्य विज्ञान) और इन सबको मिला कर अकेले सर्वज्ञ मेरे गाँव में प्राइमरी स्कूल के मास्साहेब -बुध नारायण बाबू (सभी विषयों के गुरु जी)-श्री बुद्धि नारायण झा मास्साहैब।
उससे भी और रोचक तो यह अनुभव है कि इन श्रद्धा सुमन स्मरण से मैंने जो ये गुरुनाम लिखे हैं,सब के सब प्रायः निर्दय और डरावने ही थे ! लेकिन आश्चर्य कि आज अब वे सभी हृदय से श्रद्धेय और प्रणम्य होकर याद आते हैं.मन ही मन उनके पैरों को छू कर प्रणाम करता हूँ !
💐💐💐💐💐
गंगेश गुंजन #उचितवक्ता.
Friday, September 4, 2026
। कृष्णाष्टमी ।
।कृष्णाष्टमी।
उस सीधी,सरल सन् १९५७ ई.में कहांँ मालूम था कि हमें २०२६ की ऐसीअशान्त कुरूप ईस्वी भी देखनी है..
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे.
Wednesday, September 2, 2026
विडंबना (जीवन दर्शन)
- विडंबना -
मनुष्य को यह जीवन मिलता तो है एक
अनमोल वरदान की तरह लेकिन ऐसे जैसे किसी
शिशु के नन्हे हाथों में धर्मग्रंथ या गीता-ज्ञान की
पुस्तक के समान ।
.📕. गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क
