हम तो समझे डूब कर माज़ी में कब के मर चुके,
कौन है फिर जी रहा है मज़े से इस जिस्म में। 🍁
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडे
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment