Wednesday, September 9, 2026

ग़ज़लनुमा। : मंत्रमुग्ध होना चाहे

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      मंत्रमुग्ध   होना   चाहे
     जी उससे मिलना चाहे।

    कली मुन्तज़िर है किसके
    अधरों पर  खिलना  चाहे

     किससे  मिले हुई  मुद्दत
     किससे दिल मिलना चाहे

    वक़्त शिकंजा कसता है
    ज़ीस्त नहीं  उठना चाहे

    एक बराबर ख़िजाँ बहार
   खिलना - मुरझाना   चाहे

    ख़त भर के हर्फ़-ए-मायूस
    दफ़्न छुपा रहना चाहे

   जवांँ सियासी हल्क़ों में
   जानें  क्या  घटना चाहे

    चश्मे नम वक़्त-ए-रुख़्सत
    हसरत यह रहना चाहे
                 🌼
           गंगेश गुंजन 

               #उवडे.

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