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आभासी संसार में 'नूतन आत्मरति'।
🌱🌀🌱
कृपया कहें तो -
फेसबुक आदि पर स्त्री-पुरुष जो भी हों,अगर बार-बार अपनी ही फ़ोटुओं को रस ले-ले कर डालें और लिखते रहें तो इसे एक प्रकार की 'नूतन 'आत्मरति' क्यों न समझा जा सकता है ?
आप क्या सोचते हैं लोगो ?
✨ गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क जिज्ञासा !
Saturday, September 19, 2026
आभासी संसार की नूतन आत्मरति
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