Monday, October 19, 2026

झूठ सच का बाज़ार.जनता ग्राहक

|       झूठ-सच के बाज़ार में ग्राहक जनता        |
                                 🕸️
देश की परिस्थितियाँ माक़ूल पा कर झूठ और सच का बाज़ार धड़ल्ले से चल पड़ा। बड़ी फुर्ती से विधिवत इनका बाज़ार संभव सर्वे किया गया जिसमें अखिल विश्व निर्यात की पर्याप्त संभावना पा कर तत्काल इन्हें उत्पाद भी बना लेना सोचा गया।आनन फानन में उत्पादन चालू हो गया जो उपभोक्ता रुचि के स्तर पर बॉक्स ऑफ़िस सफल साबित हुआ।

सत्य के लिए अपेक्षित संसाधन और कच्चा माल मिलना जल्दी ही समाप्त हो गया।किन्तु झूठ का  इतना विपुल कच्चा माल मिलने लगा कि इसके कारख़ाने पर कारख़ाने खड़े होते चले गए…।
   इन कारख़ानों के मिले जुले शातिर स्वामी दोनों ही तरफ़ के थे।
                        गंगेश गुंजन                             ‌।                #उचितवक्ताडेस्क

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