Thursday, September 29, 2022

संवेदना शिशु

🌿           'संवेदना शिशु'
     संवेदनशीलता जन्मौटी बच्चा जकाँ होइत अछि जे कहियो जवान नहिं होइअय। तें सृजनशील रचनाकारकें ओ बच्चा सतत अपना अपना कोरामे राखि क' पोस' पड़ैत छैक।

                 गंगेश गुंजन                                      #उचितवक्ताडेस्क।

फेसबुक पर टॉयलेट

                   🌀
    एक तो बहुत पुरानी सड़ी-गली
बात,उससे भी ज़्यादा घिसी-पिटी
भाषा में जाने कैसी लालसा है कि
कुछ लोग...फेसबुक को टॉयलेट बना      देने की सीमा तक कुछ भी लिखते         रहते हैं...
                        💤

     #उचितवक्ताडेस्क। २९.०९.'२२.

Sunday, September 25, 2022

बेटियाँ

 🏘️🏡
         सौभाग्य से उनकी सोलह
  बेटियाँ हैं। आठ तो सहज ही घर
में थीं। चार बेटियों को उनके
समधी-समधन पाल-पोस
रहे थे। अपने चार बेटों को
बारी-बारी भेज कर वहाँ से वे
सबको अपने घर लिवा आये।
और इस अनुभव से समृद्ध वे
अब अपने आप को बहुत
वैभवशाली समझते हैं।
 
       #उचितवक्ताडेस्क।

Wednesday, September 21, 2022

कविता और धंधा

                       🌿
             २२ सितंबर,२०२२.
     प्रकाशक कविता की पुस्तक नहीं   छापेंगे तो कविता मर जाएगी?
     जो कवि ऐसा सोचते हैं वे कविता नहीं, समय के अनुसार कोई धंधा ढूँढ़ लें।
                      💫
             #उचितवक्ताडेस्क।                                      गंगेश गुंजन 

Monday, September 19, 2022

बड़ी मुश्किल के दिन आने लगे हैं: मतला

                    मतला
  बड़ी मुश्किल के दिन आने लगे हैं              दोस्त भी  छोड़  कर  जाने लगे हैं 
      बड़ी मुश्किल के दिन आने लगे हैं।  
 
                     गंगेश गुंजन                                      #उचितवक्ताडेस्क।                                    १९ सितं.'२२

Thursday, September 15, 2022

ग़ज़लनुमा : ऐसा नहीं कि हममें कुछ दाग़ नहीं है

*
ऐसा नहीं कि हम में कुछ दाग़ नहीं है
ये भी नहीं मगर कोई आग नहीं है।

करने से बहुत कमतर करके भी कौंधें
कुछ हुनरमन्द जैसा हाँ,भाग नहीं ‌है।

जैसा भी है गाँव उस प' है बहुत गुमान
होता हो जहाँ हो,मिरा प्रयाग यहीं है।

खु़द लोक के रचे हैं गायें भी उसे ही
ये लोकगान है पकिया राग नहीं है।

  गढ़ते रहें बैठे हुए नव परिभाषाएँ
विप्लव कि प्रेम अपना अभिराग* वहीं है।

सूखी हुई सियासत के सुनो मुरीदो
सम्मुख खड़ा बन्दा उसका भाग नहीं है।
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*अतिशय प्रेम।

                     🛖🛖
                  गंगेश गुंजन                                     #उचितवक्ताडेस्क।


Wednesday, September 14, 2022

हिन्दी दिवस- २०२२

               हिन्दी दिवस 

        हिन्दी ही जीता - मरता हूँ
        बतियाता-गाता हूँ  हिन्दी।
                     💥                                                गंगेश गुंजन                                   #उचितवक्ताडेस्क