Saturday, December 8, 2018

सही मन से लिखा

सही मन से लिखा !

सही मनसे लिखी गई या की गई टिप्पणी आपके मन के विरुद्ध भी है तो आप को प्रभावित करती है। यह आज भी सच है कि आप उस से अभिभूत हुए बिना नहीं रह सकते।
कहना यह चाहता हूं Facebook पर कई ऐसी टिप्पणी आती है जो उस लेखक की ईमानदारी और सदाशयता की,विवेक से भरी हुई टिप्पणियां लगती हैं। कई बार विचार आता है जो आपके अनुकूल नहीं होने पर भी प्रभावित करता है और यह विशेष बात लगती है।
   युवतर पीढ़ी में यह गुण मुझे कुछ अधिक देखार लगता है। इसका स्वागत होना चाहिए।स्वागत हो भी रहा है। कभी लिखा था कि भाषा चुग़लख़ोर होती है। चुग़ली करती है। बेईमान लेखन इसका जल्द और ज्यादा शिकार होते हैं।भाषा भी आईना है !
-गंगेश गुंजन।

Thursday, December 6, 2018

कुछ ज़रूरी टिप्पणियां !

सत्ता से बाहर सत्ताभोगी और सत्ताधारी रानीतिक दल !
**
सत्ताभोगी किसी रानीतिक दल का कार्यकर्ता या नेता अगर दूसरे सत्ताधारी दल के नेता की‌ खिंचाई करता है तो यह उसकी ‘थेथरै’  ही कही जाएगी। बिल्कुल थेथरै। कारण यह कि अभी तक देश की जनता को ऐसे किसी एक भी राजनीतिक दल के शासन सत्ता में रहकर ऐसा कुछ  अनुभव नहीं हुआ है कि भ्रष्टाचार उसके गुप्त एजेंडे में‌ नहीं रहा हो। सो यह ऐसे लोकतंत्र का यह चुनावी कर्मकाण्ड भी मिलाजुला कर सत्ता का हस्तांतरण भर होकर रहता है।ठीक वैसे ही 1000 मीटर के रिले रेस के जैसा।
जनसाधारण बेचारा तो 5 वर्ष का पपीहरा है!
००
वर्तमान कितना भी छोटा हो,अतीत से बड़ा होता है लेकिन वर्तमान कितना भी बड़ा हो भविष्य से छोटा होता है।
२.
संस्कृति माफ़िया !
चंदन माफिया,कोयला-बालू-
माफ़िया और  के समान ही देश भर कहीं 'संस्कृति माफिया' का भी उद्भव और विकास तो नहीं हो गया लगता है ? अगर है तो इसका संपोषण निश्चित ही राज्य और केन्द्रीय सरकारों के संस्कृत मंत्रालय और उनसे संबद्ध केंन्द्र और राज्यों की अकादमियां करते हैं। अपवाद छोड़ दें तो इसके उत्स चाहे जो और जहां भी रहें।
३.
नानी विद्या
संस्कृत मेरी नानी विद्या है।(विद्यानानी)! क्योंकि मैंने हिन्दी पढ़ी है और संस्कृत हिन्दी की जननी है, सो संस्कृत मेरी नानी विद्या है।

-गंगेश गुंजन।६.१२.

Sunday, November 18, 2018

जो भी लिखना दिखकर लिखना

जो भी लिखना दिखकर लिखना
🌻
भूले से मत छुपकर लिखना
जो भी लिखना दिखकर लिखना
🌻
नहीं जरूरत तो चुप  रहना
काम पड़े तो ज़ोर चीख़ना ।
🌻
रहने लायक रहे तो अच्छा
नहीं मिले तो कभी न रहना।
🌻
कितना कुछ सह गये उम्र भर
अब लेकिन कुछ भी मत सहना
🌻
मुश्किल क्या कि दरिया हो ही
ख़्वाब और ख़़याल में बहना
🌻
तुम तो हो मज़बूत इमारत
बालू के घर-सा मत ढहना।
🌻
संदेशा कहने में उसको
हकलाना मत खुलकर कहना।
               🌻🌻         
                      गंगेश गुंजन,
                  १८नवंबर,’१८.

कांच

🍂🍂
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      🍂   🍂
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‘मिरे भी हाथ से एक जाम गिर के टूटा था
आज तक दिल में कोई कांच चुभती रहती है।’
🍁
     🍁
गंगेश गुंजन

Tuesday, November 13, 2018

थाली में 🌒

🌒
चांद थाली में दिखाकर हमें बहलाते हैं।
हमारी संसद के हमारे ये माई-बाप !
!
-गंगेश गुंजन

Wednesday, November 7, 2018

दीये की आयु

*
एक दीया तब तक जलता है जब तक उसे तेल और बाती का साथ रहता है।  दोनों में से किसी एक के चुक जाने से उस दीये का भी अस्तित्व नहीं रहता।
दीये की आयु उसमें तेल और बाती के बराबर है।

-गंगेश गुंजन।७.११.’१८.

Saturday, November 3, 2018

राजनीतिक वक्तव्य एक निवेश ।

राजनीतिक वक्तव्य: एक निवेश की तरह !
*
राजनीतिक वक्तव्य एक निवेश की तरह होते हैं।जैसे सावधि जमा खाता होता है,एक प्रकार का वित्तीय निवेश । फ़िक्स्ड डिपाजिट।जमाकर्ता को जिस तरह पांच वर्ष की अवधि के जमा खाते में जमा (फ़िक्स्ड) राशि, उसे सूद समेत मिल जाती है। वैसे ही राजनीतिकों को भी लोकतंत्र के चुनावी 5 वर्षों के शांति काल में दिए गए पक्ष या विपक्ष के उनके वक्तव्य का मूल्य सभी सत्ता और सरकार के आने पर सूद समेत मिलता रहता है मिल जाता है। अलबत्ता जिसकी जितनी राशि का निवेश है यानी वक्तव्यों का निवेश है। जिस मूल्य के वक्तव्य का निवेश है उसी के अनुपात में नई सत्ता नई सरकार उनका भुगतान करती चलती है ।भुगतान का स्वरूप भले ही वित्तीय सुविधाओं से लेकर सम्मान प्रतिष्ठा और संस्थागत पदों पर अध्यक्ष, निदेशक इत्यादि पदों से सुशोभित करने के रूप में किया जाता है। अब लोकतंत्र के इतने स्वतंत्र स्वाधीन वर्षों में इसे यह देश जान गया है । साधारण जनता का जानना बाकी है। जिस दिन इसे जान गई...।

-गंगेश गुंजन।