लगा है इस तबीअत से वो अपना घर बनाने में। कि जैसे रहना हो उसमें उसे दो-तीन सौ बरस।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
लगा है इस तबीअत से वो अपना घर बनाने में। कि जैसे रहना हो उसमें उसे दो-तीन सौ बरस।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
🌳 ग़ज़ल सन
के बताह आ के घताह अछि। ई घताह अछि ओ बताह अछि।
अनशनकारी धरनाधारी वा ई सरकारे बताह अछि।
मांगहि कृषकक छनि अनर्गल। कि सरकारक रुखि चोटाह अछि।
न्यायिक असमंजसता मे सब वातावरण भेल अथाह अछि।
देशहिं नहिं भरि विश्वे पसरल मीडियाक मति दुखताह अछि।
एना एतेक दिन धरना भरना। दोष जकर हो से घवाह अछि।
जो जितला बलु हारथि ट्रंपे किछु त लोकतंत्र दोखाह अछि।
भरि संसारक सबहि युद्ध मे होइत तं जनते तबाह अछि।
कहिया न अयल न'व चेतना लोक बुद्धि एखनो अबाह अछि।
जेहन मीठ बजारक बोली दाम तेहन सबहक कटाह अछि।
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
💤 । 🌀। बाज़ार में जुड़वां ! 🌀। 💤
बाज़ार में आजकल मोह लेने वाले ढब का
एक जुड़वां घूम रहा है। कहते हैं ये दोनों भाई-
सच और झूठ हैं।
और ये इतने लोकप्रिय हैं कि सभी टीवी
चैनेल-पैनेल में पर छाये हुए हैं।
ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
इस वक़्त मेरे पास कोई और नहीं है।
इस वक़्त मेरे साथ मेरा वक़्त नहीं है।
🦜
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
मोस्तैदी सं रखबारी कयल जाइत छैक।
स्नेह तं एकांतक उन्मुक्त क्रियाभाव थीक।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
रह लूंगा जो
थोड़ा-थोड़ा भी रह लूंगा कुछ तो दुनिया को कह दूंगा।
प्यारा है यह जीवन कितना झेलूंगा सब दु:ख सह लूंगा।
सबकुछ कैसे बदल रहा है समझाऊंगा ख़ुद बदलूंगा।
सब बेमानी व्यर्थ नहीं है मक़्सद देकर मानी दूंगा।
बुला रहा है कोई तन्हा पहले उसकी सदा सुनूंगा।
कविता है खु़द असमंजस मे इसको भी इसमें बदलूंगा।
अब समझे हैं लोकतन्त्र का पत्ता हूं पत्ता-ही गिरूंगा।
रहे चांद बादल में घिर कर मैं तो रवि जैसा ही ढलूंगा।
नयी लहर की इस दुनिया में अंधियारी तक जल-बुझूंगा।
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ता डेस्क।
संकल्प का स्वभाव तो पथरीला है किन्तु निभाना,तरल जल कोमल और दोस्ताना।
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।