Wednesday, February 26, 2020

दु:ख का पहाड़ और जीवन !

      * दु:ख का पहाड़ और ज़िन्दगी *


मनुष्य के जीवन पर दु:ख का पहाड़ भी पड़ जाये तो भी जीवन उसे बेल्लाग उतार फेंक कर निकल जाता है।ज़िंदगी उसे ऐसाचकमा देती है कि दु:खोंका पहाड़ धरा ही रह जाता है।

   -गंगेश गुंजन।                            [उचितवक्ता डेस्क]

Tuesday, February 25, 2020

फेसबुक-क़द

।।               फेसबुक-क़द               ।।
                       🤔
कभी सामान्य मित्र के रूपमें फेसबुक पर पधारे हुए कुछ लोग अकस्मात अपना क़द बहुत ऊंचा कैसे कर लेते हैं और हमारा पद इतना नीचा ?
                [उचितवक्ता डेस्क]
‌‌                २६फ़रवरी,२०२०.    

Monday, February 24, 2020

हिंसक राजनीति

हिंसक राजनीति बाल रोगी और अल्पायु होती है। बहुत जल्द काल कवलित हो जाती है।

                     -गंगेश गुंजन                                      (उचितवक्ता डेस्क)

Saturday, February 22, 2020

राजनीति का पतझड़।

          राजनीति का पतझड़

देश में राजनीति का पतझड़ कुछ ज़्यादा ही समय‌ चल रहा लगता है। कहीं से नयी कोंपल फूटती दिखे तो वसन्त की उम्मीद झलके।🍂🍂🍂🍂🍂  गंगेश गुंजन।                  ।उचितवक्ता डेस्क।

Tuesday, February 18, 2020

कभी-कभी

                 कभी-कभी

कभी-कभी हम दोनों किसी रेस्तरां में खाने-वाने चले गये तो वहां प्रेम से एक साथ खाते-बतियाते जवान जोड़ियों को देख कर भी बहुत आनन्द होता है।बल्कि मन ही मन उनके लिए और आशीर्वाद आता है। लेकिन ऐसे में ही कहीं जो किन्हीं अकेले बृद्ध जोड़े पर नज़र पड़ जाती है तो मन में उनके लिए अथाह करुणा भी हो आने लगती है।

       मैंने एक दिन यह बात पत्नी से जो कही तो पलट कर बोलीं-'और हमलोगों को देख कर उन्हें ? हम दोनों पर भी उनको दया आती होगी। ऐसे ही।' कह कर वह मुस्कुराना नहीं भूलीं।

       आपको क्या लगता है?

                      😊!😊

                   -गंगेश गुंजन

Friday, February 14, 2020

.....उसी की नदी होकर

वही जिसने मुझे बना डाला पत्थर ।         रेत में बहता हूँ उसी की नदी होकर।                                  ***

                   गंगेश गुंजन

Thursday, February 6, 2020

यूं ही नहीं बन जाता मन माफ़िक़ संसार।

सबकुछ बदलने के लिए कुछ खुद भी बदलिए।                                              यूं ही नहीं बन जाता मन माफ़िक़ संसार।               

                  गंगेश गुंजन                    

              (उचितवक्ता डेस्क)