|🌈
रह लेते जा कर अब गुंजन,
और कहीं तो अच्छा था.
बेसुकून वक़्तों में माँगे
दिल अब कोई और दहर।
🌊
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
Friday, May 10, 2024
दो पंँतिया : रह लेते ज कर अब गुंजन।
Wednesday, May 8, 2024
ग़ज़ल नुमा : इसमें या उस दरिया जाय
🌓
इसमें या उस दरिया जाय
किस दरिया जा डूबा जाय।
एक तरफ़ अंधी धतकर्मी
दूजा जिसको मन गरिआय।
सन्तन को भी सत्य कहांँ अब
झूठ-मूठ ही अधिक सुहाय।
एक तो अर्जित भर वैभव
दूजा सबकुछ रहा लुकाय।
अचरज क्या अखबारों में
दानवीर कल कथा छपाय।
सब असनान बाथरूम में
को जा के गंगा में नहाय।
क्या सूझै जब ख़ाली पेट
किस बज़ार में करे उपाय।
🙊🙊
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
Tuesday, May 7, 2024
नैतिकता का हथियार और राजनीति
नैतिकता के हथियार से राजनीति की लड़ाई हास्यास्पद सोच है।
.🌓. गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
Sunday, May 5, 2024
किछु दु पंँतिया
। 📔।
लाल कलम में कारी मोसि
सावधान किछु दुर्घट हयत।
•
जहिए संँ लीख’ लगलै कवि लाल
कलम सँ कारी बात
तहियेसँ जनता पर बढ़लै
केहने-केहने दन आघात।
•
सब दिन क्यो सम्राटो नहि
सम्राजो सब एक दिन जाइछ।
•
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
Saturday, May 4, 2024
घृणा : ईंधन
🔥। नफ़रत : ईंधन .
सृष्टि में अकार्यक शायद ही कुछ है यहाँ तक कि आदमी की नफ़रत।
जिस प्रकार मनुष्य की बिष्ठा से भी गैस,ऊर्जा तैयार की जा सकती है और रात भर उससे रौशनी के खम्भे में जलते हुए अंधेरी सड़कों पर प्रकाश फैलाया जा सकता है,जाड़ों मे तापने योग्य जलावन और खाना पकाने में ईंधन की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है तो इतनी विशाल घृणा को भी वाँछित ऊर्जा में परिवर्तित क्यों नहीं किया जा सकता। सकारात्मक बेहतर बहुत कुछ ? बजाय इसके कि सुबह से शाम,रात तक हम अपनी नफ़रतें व्यर्थ ही यहांँ-वहांँ जुगाली करते और थूकते फिरें ?
बहुत कुछ नहीं भी हो यह फेसबुक किन्तु ख़ामख़्वाह कोई उग़ालदान भी नहीं है।ऐसे में भाषा भी तो प्रभावहीन होती जा रही है। सहलाये या आघात करे अपना काम तुरत करने पर ही भाषा भाषा है।
सिर्फ वर्तमान विद्यमान ढोना ही तो इसका काम नहीं।भविष्य ज़्यादा निर्भर है इसमें।
स्वतंत्रता भी तो हम गूंगी नहीं- भाषा में पाते हैं।
🌿
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
Thursday, May 2, 2024
दो पँतिया : बहुत छोटा घर हमारा...
बहुत छोटा घर हमारा अभी तक एकान्त था। एक बच्चा आ गया यह घर बड़ा लगने लगा।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
