रचना से आलोचना-आचरण तक आदर्श, कहीं न कहीं एक नैतिकता से जुड़ा तो होता है लेकिन प्रायोजित नहीं रहता। इस धारणा की उम्र अब समाज में शेष प्राय है क्या ?
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
रचना से आलोचना-आचरण तक आदर्श, कहीं न कहीं एक नैतिकता से जुड़ा तो होता है लेकिन प्रायोजित नहीं रहता। इस धारणा की उम्र अब समाज में शेष प्राय है क्या ?
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
। 🌳।
पृथ्वीक सभसंँ पैघ बासन !
पृथ्वी पर सब सँ पैघ बासन की थीक ?
-मनुष्यक मोन। मन जेहन बासन अछि जे
एहि मे तँ ओहो बस्तु अँटि जाइत छैक जे
पृथ्वी पर नहिं अँटि पबैत छैक। अओर
ओहो सब जे भविष्य मे अबैया छैक।
मन सृष्टिक विकल्प थीक।
#उचितवक्ताडेस्क।
गंगेश गुंजन
।🌸। ग़ज़लसन ।🌸।
कहि रहल छी हम जहिना रहि रहल छी हम तहिना।
जेना सब लोक जीबय हमहुँ जीबै छी अहिना।
चलै छी कतबो बामा लोक धकलैए दहिना।
नजरि एतबेक दुनियाँक गनती काल-दिन महिना।
स्वभाव ओ नहिं बदलत राज रहते सब एहिना ।
मोश्किल तंँ बदलैए नहि लोको रहैए ओहिना।
दु:ख मे गुंजनक दोस्त रहि रहल ओकर बहिना। ।🌸।
-गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
फगुआ माथे...
एन.जी.ओ.कवि !
!💐!
बहुतो कवि-लेखक-आलोचक आइ काल्हि अपन-अपन एन.जी.ओ.छथि।
⚡!⚡
#उचितवक्ताडेस्क।
ख़ामुशी तब बोल जाती थी जितनी बात।
हम इश्क़ में ताउम्र बोल कर न कह सके।
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।