📕 कुछ शब्द आजकल,
आदमी के होंठों पर आते ही या,क़लम से काग़ज़ पर उतरते ही राजनीति बन जाते हैं,चाहे वे कितने ही स्वच्छ हृदय से कहे-लिखे गए ही क्यों न हों।
🌘 गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
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