• यहाँ.
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कुछ प्रोफेसर टाइप प्रबुद्धों को लगता है मानो अवकाश प्राप्ति के बाद भी वे क्लास में छात्र पढ़ा रहे हैं। कुछ एक तो फेसबुक पर भी अनवरत
समुपलब्ध हैं। परन्तु
यहीं पर कुछेक प्रोफ़ेसर यदि फेसबुक पर लिखना छोड़ दें तो हम जैसे कितने ही फेसबुकिए फेसबुक को ही छोड़ दें।
विशद सामाजिक जीवन में मनुष्य की ऐसी ही कुछ रोमांँचक चुनौतियांँ भी हैं जिनमें चकित और अकस्मात् प्रेरित कर देने वाले कितने ही अवसर भी झलकते हैं !
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.

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