Wednesday, June 24, 2026

किसी किसी शे'र का वर्तमान


     बा-रब्त भी नहीं है बे रब्त भी नहीं है ज़ालिम की गुफ़्तगू में अंदाज़ है ग़ज़लका।
           (ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ)
                       🍂
कृपया,
मौजूदा राजनीति से इसका कोई संबंध न पढ़ें-देखें।                 #उचितवक्ताडे.

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