बा-रब्त भी नहीं है बे रब्त भी नहीं है ज़ालिम की गुफ़्तगू में अंदाज़ है ग़ज़लका।
(ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ)
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कृपया,
मौजूदा राजनीति से इसका कोई संबंध न पढ़ें-देखें। #उचितवक्ताडे.
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