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किसी उपलब्धि को नाक से मत लगाएंँ। एनिस्थीसिया होती है। इसे सूंँघें नहीं। ध्यान रहे,नाक से स्पर्श हुआ नहीं कि प्रबुद्ध से प्रबुद्ध चेतना भी सुषुप्तावस्था में चली जाती है !
|💐|। गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।

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