विशेषण के प्रयोग का आलोचकीय इल्म ही स्वस्थ आलोचना का यथार्थ लक्षण और चरित्र होता है।
गंगेश गुंजन
# उचितवक्ता डेस्क।
विशेषण के प्रयोग का आलोचकीय इल्म ही स्वस्थ आलोचना का यथार्थ लक्षण और चरित्र होता है।
गंगेश गुंजन
# उचितवक्ता डेस्क।
सामर्थ्य,चेतना और विवेक साथ में रख कर भी आदमी, दासता का सफ़र करता रहता है।मनुष्य का पराभव हाथी से कितना मिलता-जुलता है।
गंगेश गुंजन
# उचितवक्ता डेस्क।
हाथी अपनी स्वतंत्रताका शत्रु-अंकुश, अपने ही कान पर लटकाये चलता है, विडंबना देखिए।
गंगेश गुंजन
# उचितवक्ता डेस्क।
अभिधा में की जा रही कोई प्रशंसा ख़ुशामद या चापलूसी लगती है।वही व्यंजनामें प्रशंसा लगती है। !🙂!
गंगेश गुंजन
[उचितवक्ता डेस्क]
'पांव-पैदल चल कर पाती हुई सफलता चमकदार और अधिक टिकाऊ होती है।' पिता कहते थे।
गंगेश गुंजन
[ उचितवक्ता डेस्क ]