गर्दिश की गुफ्त़गू से गरमागरम है मज्लिस।
बदज़ौक़ हैं ये लोग जो दुनिया से ख़फ़ा हैं। गंगेश गुंजन
-उचितवक्ता डेस्क-
गर्दिश की गुफ्त़गू से गरमागरम है मज्लिस।
बदज़ौक़ हैं ये लोग जो दुनिया से ख़फ़ा हैं। गंगेश गुंजन
-उचितवक्ता डेस्क-
हमारी आस्था के दुर्ग में हम सुरक्षित हैं।
नई तकनीक के पैलेस में डर लगता है ।
🌳 गंगेश गुंजन
तन-मन चेतन कलाकार हूं।
निर्विष हूं मैं निर्विकार हूं।
उतना ही मनुष्य हूं जितना
नयी सदी के सद्विचार हूं। 🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
गंगेश गुंजन
-उचितवक्ता डेस्क-
बदलते रहते हैं अपना ही उन्वाने किताब लोग।
नहीं बिकने लगे हैं शहर में अब उनके रिसाले।
गंगेश गुंजन। -उचितवक्ता डेस्क-
सत्य और असत्य मानवीय विवेक की सबसे कठिन परीक्षा का प्रश्नपत्र हैं।
गंगेश गुंजन
(उचितवक्ता डेस्क)