!🌺!
वैसे जो कहिये,
पिता-दिवस,फादर्स डे-का यह
मुशायरा तो बेटियां ही लूट गईं !
! 🌺 !
(उचितवक्ता डेस्क)
गंगेश गुंजन
Sunday, June 16, 2019
पिता का दिन !
लेखक लेखक वर्ग
🌈
कुछ लेखक लेखिका,विशेष साहित्य-संसर्ग के वातावरण में विकसित और संस्थापित हुए होते हैं और कुछ (लेखक- लेखिकाएं) जो गुण में भी कम नहीं और संख्या में अधिकांश हैं, वे साहित्य के साधारण संसर्ग के वातावरण में पनपते और विकसित होते हैं साधारण संसर्ग में आये हुए ऐसे कोई-कोई लेखक-कवि अपवाद स्वरूप स्थापित भी हो जाते हैं।
। 🙄 ।
(उचितवक्ता डेस्क)
गंगेश गुंजन
Saturday, June 15, 2019
व्यंग्यकार की कृषि भूमि !
😜
विद्यमान राजनीति व्यंग्यकार की
खेती-बारी और आखेट-भूमि है।
! 😜 !
(उचितवक्ता डेस्क)
गंगेश गुंजन
Friday, June 14, 2019
प्रेम और प्रतीक्षा
🌫️
प्रतीक्षा प्रेम की परीक्षा भी है
और परिणाम भी।
🍁
(उचितवक्ता डेस्क)
गंगेश गुंजन
Thursday, June 13, 2019
साहित्य में प्रभु-प्रजा वर्ग !
🔥
देश के समाज एवं राजनीति की
तरह साहित्य और कलाओं में भी,
'प्रभु' और 'प्रजा' वर्ग,ये दो ही
मुख्य अस्तित्व में रहते हैं क्या !
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गंगेश गुंजन
Wednesday, June 12, 2019
आदमी और रचनाकार
🔥
एक अच्छा इन्सान बुरा रचनाकार
नहीं हो सकता।जबकि एक अच्छा
लेखक,आदमी बुरा हो सकता है।
🌳
(उचितवक्ता डेस्क)
गंगेश गुंजन
Tuesday, June 11, 2019
कुर्सी पर बैठे छोटे-बड़े
🌈
कुछ लोग बड़ी कुर्सी पर बैठे हुए भी छोटे लगते हैं।
कुछ लोग छोटी कुरसी पर बैठ कर भी बड़े लगते हैं।
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गंगेश गुंजन
