Sunday, May 16, 2021

कोरोना बनाम अतिथि देवता

             कोरोना और अतिथि देवो !

मेरे परम शुभेच्छु मित्र समाधान प्रसाद जी की चिन्ता भी नवोन्मेष कारी ही होती है। हरदम देश और समाज भक्ति से ओत-प्रोत नये अनुभव,अंदेशा और कार्रवाई वाली ऊँचे अभिप्राय से लदी चिन्ता। सो कुशल क्षेम के तुरत बाद आपने इस बार जो महा चिंता प्रगट की उस पर ज़रा आप भी ग़ौर फ़रमायें। बोले:

'कवि जी,

अभागा कोरोना कहीं यह तो नहीं माने बैठा कि भारत तो 'अतिथि देवो भव' का आदर्श मानने वाला देश है कभी मुँह खोल कर तो लौट जाने के लिए कहने वाला है नहीं,और  भगायेगा यह तो सोचा भी नहीं जा सकता सो यहीं जम जायें और इसी इत्मीनान में जम तो नहीं रहा है यहाँ ?

    तो संविधान संशोधन तक करने वाले भारत को नया भारत बनना है अगर तो अपने 'अतिथि देवो भव' वाले आदर्श में भी तनिक संशोधन नहीं करना चाहेगा ?'

अब आप भी सोचें समाधान बाबू की चिन्ता को ! 

                   गंगेश गुंजन

              #उचितवक्ताडेस्क।


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