Thursday, December 12, 2019

एक जुगनू उम्मीद !

    ज़िन्दगी की तमाम तीरगी                        सामने एक जुगनू उम्मीद।

              गंगेश गुंजन।

Tuesday, December 10, 2019

मतला :कभी‌ मिल जाय

कभी मिल जाये तो अपना कहूंगा।          नहीं मिल पाये तो सपना कहूंगा।                                           गंगेश गुंजन।

Monday, December 9, 2019

बांस की विनम्र ऊंचाई

बांस की विनम्रता देखिये कि जैसे ही उसे  लगने लगता है कि वह बहुत ऊंचा और लंबा हो गया है तो वह अपनी छीप(फुनगी) पर ऊपर से ज़मीन की तरफ झुक जाता है। मगर बड़े पेड़ों का गु़रूर देखिये जो झुकना नही जानते। अपनी ऊंचाई में धरती पर फैलते ही चले जाते हैं।

उचितवक्ता डेस्क

Sunday, December 8, 2019

झरोखे से हिमालय !

किसी रौशनदान से हिमालय देख पाना सहज ‌संभव‌ है। हिमालय से कोई रौशनदान देखना सहज संभव शायद ही।

गंगेश गुंजन। (उचितवक्ता डेस्क).          


Friday, December 6, 2019

मनुष्य और फुटबाल

             मनुष्य और फुटबॉल

लुढ़क कर मनुष्य जितनी ऊंचाई से भूमि पर गिरता है वह उतना ही चकनाचूर होकर बिखरता है। फुटबॉल उतनी ही ऊंचाई से लुढ़क कर भूमि पर गिरता है तो उसका कुछ नहीं बिगड़ता है। लुढ़कना फुटबॉल का स्वभाव है आदमी का नहीं।🌳🌳

गंगेश गुंजन। (उचितवक्ता डेस्क)

Wednesday, December 4, 2019

प्रेम और गंगाजल !

गंगाजल भी फूटे हुए पात्र में रखा जाय तो कभी रिस जाता है। प्रेम तरल होकर भी अपनी चाहत के पात्र में टिका ही रहता है।         
          गंगेश गुंजन।(उचितवक्ता डेस्क)

नया एक दिल है मेरा

                       🔥

बाज़ार में आया नहीं है कोई नया ब्राण्ड।    नया एक दिल है मेरा जो मैं बेचूंगा नहीं।                       गंगेश गुंजन।