Tuesday, January 27, 2009

अभी तो लगता है कि मैं सिर्फ अभ्यास में ही अपनी पूरी उर्जा लगाए ता जहा हूं। तो क्या यह व्यर्थ ही जाने वाला है ? अपनी ही तरह की दिलचस्प हो गई यह मेरी ब्लाग व्यवस्था !

28 जन.09, बुधबार। दु. दा. कबीर.

Monday, January 26, 2009

कियेक मन पड़लए "कहल सुनल माफ बन्धु सब हिसाब साफ बन्धु !

Monday, January 19, 2009

फिर से कुछ कुछ करना सीखें फिर से कुछ कुछ कहना

बहर हाल ह बहुत ज़रूरी इन दोनों का आना