Monday, November 22, 2021

ग़ज़लनुमा। :

                  🏘️|🏡

    सब हुनका अधिकारे छनि कि तंँ
    पैघ लोक छथि।
    किच्छु करथि खैमस्ती मे कि तँ
    पैघ लोक छथि।

    अपना मनक राजा छथि ओ
    स'ब प्रजा छनि।
    प्रजातंत्र अनुरागी कि तँ पैघ
    लोक छथि।

    कुरहड़िए सँ नाथथि महिंस
    हुनकर इच्छा
    की मजाल क्यो टोकनि कि तँ
    पैघ लोक छथि।

    सऽब छजै छनि किछु कऽ
    गुजरथि आ कउखन
    दुपहर मे टहलथि प्राती कि तँ
    पैघ लोक छथि।

    बलधकेल बेसी व्यवहार करथि
    धुर्झार
    स्वजनहुंँ कें दुतकारथि कि तंँ पैघ
    लोक छथि।

    क'रब धरब सब टा अपने मोनक
    मालिक
    स्वामी सर्वज्ञानी छथि कि तँ पैघ
    लोक छथि।

    एकहि गाम एक समाज मे रहथि
    एकढ़वा
    कत्तहु आना जाना नहिं कि तंँ
    पैघ लोक छथि।

    मिला जुला संसदीय क्षेत्रक
    बड़का नेता
    राजाक निर्माता छनि कि तँ
    पैघ लोक छथि।

    जेहन प्रयोजन दलक प्रबन्धन
    गुण कुशल
    जाति युद्ध सँ दंगा धरि कि तँ
    पैघ लोक छथि।
                     | 🌸|
              #उचितवक्ताडेस्क।

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