Sunday, August 1, 2021

ग़ज़ल नुमा। वो किधर गया

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    वो उस तरफ़ अगर गया होगा
    जानिए और मर गया होगा।

    हम ये समझे समझ है उसमें
    अबके अपने घर गया होगा।

    आशियाँ कहाँ कहाँ मयख़ाना
    दरम्याँ क्यूँ ठहर गया होगा।

    चल रहा था उसूल पर चर्चा
    बाज मौक़े प'अड़ गया होगा।

    अब सुहाए भी कुछ नहीं उसको
   अपनी जिद ही पकड़ गया होगा।

    नाक फटती है आम लोगोें की
    हाले माहौल सड़ गया होगा।

    ठीक इतनी भी नहीं बेज़ारी
    इस अहद में किधर गया होगा।

              गंगेश गुंजन।
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           #उचितवक्ताडेस्क।

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