🌐 ऐसे समय .
शब्दकोषों में हो जाएँ
पेशेवर कविजन !
विप्लव ज़िद्दी कवि-कलाकार,
कुछ दिनों के लिए भूमिगत होकर ठीक
से करें विचार
क्रांतदर्शी लोग थोड़ा विश्राम कर लें
अभी करें नया पथ आविष्कार ।
नहीं सुरक्षित है अगर यह दुनिया,
समाज तो अलबत्ता तलाश लें कोई
दुर्गम विकल्प कोई
अभेद्य महावन जैसा,जो भी
वहीं करें अपने आख्यानों का
पुनरावलोकन-चिंतन।
दिखने से बेहतर है, लगें ।
इस ज़ालिम वक़्त में यही होगा ठीक-
दिखें नहीं,लगें।
इस काल यही करें
कुछ भी करना है ज्योति-सार्थक
और परिव्याप्त व्यवस्था विरुद्ध.
▪️
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.

No comments:
Post a Comment