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ग़ज़लनुमा
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दिल कुछ ऐसा अफ़साना लिख
सुख हर शख़्स के सिरहाना लिख
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बँटे हुए भी ग़म के इलाक़े
सबको कुछ कम वीराना लिख
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ख़ुदा गवाही से बढ़ कर के
रूह दिखादे खुल जाना लिख
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मिले हुए हो गए बहुत दिन
'कल रेस्त्राँ में आ जाना' लिख
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.

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