Sunday, April 26, 2026

आम आम बनाम सुख और सुख (टिप्पणी)

आम ज़र्दालू ही क्यों न हो मनुष्य को दीघा माल्दह खाए बिना तो पूरा चैन मिल ही नहीं सकता।
   सुख का भी यही हाल है। सुख भी आदमी को एक ही तरह का नहीं विविध प्रकार का मिले तभी तृप्त होता है। 
                          🌀                     गंगेश गुंजन 
#उचितवक्ताडे.

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